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ईरान का अमेरिका को अल्टीमेटम: बंदरगाहों की नाकेबंदी को बताया युद्धविराम का उल्लंघन, लाल सागर को ठप करने की दी धमकी

US Navy: अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी, तेल व्यापार, चीन के टैंकर और वैश्विक समुद्री मार्गों पर इसके असर को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बन गई है।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 15 Apr 2026, 6:16 PM IST

IRGC

Islamic Revolutionary Guard Corps (Photo - IANS)

Hormuz Strait tension: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष-विराम के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों देशों में तनाव बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में ईरान की सेना ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसेना द्वारा नाकेबंदी किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे संघर्ष-विराम का घोर उल्लंघन बताया है और कड़ी चेतावनी दी है।

इस संबंध में ईरान की सर्वोच्च संयुक्त सैन्य कमान ‘ख़ातम अल-अनबिया’ केंद्रीय मुख्यालय के प्रवक्ता की ओर से कहा गया, 'अगर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहती है, तो हमारी सेनाएं लाल सागर के रास्ते व्यापार को चलने नहीं देंगी। अगर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहती है, तो हम खाड़ी और ओमान सागर में किसी भी प्रकार के निर्यात या आयात की अनुमति नहीं देंगे।' साथ ही आगे चेतावनी देते हुए कहा गया कि अगर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखता है, तो यह संघर्ष-विराम के उल्लंघन की शुरुआत होगी।

ईरान की सेना की ओर से इस चेतावनी के बाद अमेरिका के साथ क्षेत्र में टकराव की आशंका बढ़ गई है। इस कदम के ऐलान के बाद होर्मुज स्ट्रेट के साथ-साथ खाड़ी और ओमान सागर के अलावा लाल सागर के रास्ते भी व्यापार प्रभावित हो सकता है।

चीन को ईरान का तेल नहीं लेने देंगे: अमेरिका

ईरान की सेना की ओर से चेतावनी जारी करने से पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की ओर से बड़ा बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था कि चीनी जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरकर ईरान का तेल लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि अमेरिकी कार्रवाई का मकसद यह है कि चीन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग के जरिए ईरान का कच्चा तेल नहीं ले सके।

नाकेबंदी का असर

ईरान के खिलाफ अमेरिकी नाकेबंदी का असर दिखने लगा है। चीनी टैंकर ‘रिच स्टार्री’ अमेरिकी नाकेबंदी को तोड़ने में नाकाम रहा और उसे होर्मुज स्ट्रेट से वापस लौटना पड़ा। इससे पहले अमेरिकी नौसेना ने कड़ा रुख अपनाते हुए चाबहार बंदरगाह से निकलने की कोशिश कर रहे दो तेल टैंकरों को भी रोक दिया था।

अमेरिकी नाकेबंदी का असर समुद्री व्यापार पर भी पड़ा है। जहां पहले 130 से अधिक जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, वहीं अब उनकी संख्या काफी कम हो गई है।