2 जून 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Lebanon में कोहराम: डोनाल्ड ट्रंप की ‘नो वार’ थ्योरी फेल ? इजरायल ने किए भीषण हवाई हमले

Middle East Peace: डोनाल्ड ट्रंप के युद्ध रोकने के दावे के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने लेबनान पर अब तक का सबसे घातक हमला कर दिया है। इस बमबारी में भारी तबाही हुई है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

Jun 02, 2026

Israel attacks Lebanon

इजरायल का लेबनान पर हमला। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)

Geopolitics: वैश्विक भू-राजनीति में जब शांति के कयास लगाए जा रहे थे, ठीक उसी समय मिडिल ईस्ट से एक बहुत डरावनी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से पश्चिम एशिया में 'गोलीबारी और युद्ध' रोकने के बड़े दावे के ठीक बाद, इजरायली सेना ने लेबनान पर भीषण हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इन हमलों में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और अमेरिकी प्रभाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रंप ने क्या कहा था और जमीन पर क्या हुआ ?

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने एक बयान में आश्वस्त किया था कि मिडिल ईस्ट में चल रहा खूनी संघर्ष जल्द ही थम जाएगा और बंदूकें शांत हो जाएंगी, लेकिन उनके इस बयान की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान के रिहायशी और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाके इतने जोरदार थे कि कई इमारतें पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो गईं।

हमले की भयावहता और जमीनी हालात

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, इन ताजा हमलों में कई नागरिकों की जान जा चुकी है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इजरायल का दावा है कि उसने हिजबुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाया है, लेकिन धरातल पर आम नागरिक इस युद्ध की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। अस्पतालों में आपातकाल घोषित कर दिया गया है और मलबे से शवों को निकालने का सिलसिला जारी है।

वैश्विक मंच पर तीखी प्रतिक्रियाएं

इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हड़कंप मच गया है। लेबनान सरकार ने इसे 'खुला आक्रामक नरसंहार' करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। वहीं, ईरान ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि अमेरिका एक तरफ शांति का नाटक करता है और दूसरी तरफ उसके सहयोगी देश तबाही मचा रहे हैं। यूरोपीय देशों ने भी आम नागरिकों की मौत पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

क्या युद्धविराम की उम्मीदें हुईं खत्म ?

इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद अब युद्धविराम की बातचीत खटाई में पड़ती हुई नजर आ रही है। जानकारों का मानना है कि इजरायल के इस कदम से हिजबुल्लाह और आक्रामक रुख अपना सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में 'फुल-स्केल वॉर' का खतरा बढ़ गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय अब इस स्थिति को संभालने के लिए बैकचैनल डिप्लोमेसी का सहारा ले रहा है, लेकिन फिलहाल युद्ध रुकने के आसार नहीं हैं।

डोनाल्ड ट्रंप की साख दांव पर

इस पूरे घटनाक्रम का एक राजनीतिक पहलू डोनाल्ड ट्रंप की छवि से जुड़ा हुआ है। ट्रंप हमेशा खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करते हैं जो युद्ध रुकवा सकता है। लेकिन पद संभालते ही या उनके बयानों के तुरंत बाद इस तरह का भीषण हमला होना यह दिखाता है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी सैन्य रणनीतियों को लेकर किसी भी बाहरी दबाव को मानने के मूड में नहीं हैं।