
103 relatives of Gaza man killed
इजरायल और फिलीस्तीन का ये युद्ध (Israel-Palestine War) कितनी जिंदगियां तबाह कर चुका है, इसके सिर्फ आंकड़ें सामने आते हैं। लेकिन कितने मासूम और निर्दोष लोगों की जिंदगियां और उनके जीने की वजहों को इस युद्ध में कुचला जा चुका है, इसके आंकड़ें नहीं पेश किए जा सकते। इन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है और जिसने ये महसूस किया है वो अब खुद मरने की पेशकश कर रहा है। कुछ ऐसी ही कहनी है गाजा में रहने वाले अहमद-अल-गुफेरी की।
गाजा में 103 रिश्तेदार मारे गए
अहमद-अल-गुफेरी रोते हुए कहते हैं कि जब गाजा (Gaza) उनके परिवार पर हमला हुआ तो अपनों के पास थे भी नहीं। वो अपने परिवार से लगभग 50 मील दूर जेरिको के कब्जे वाले वेस्ट बैंक (West Bank)
में फंस गए थे। वो तब तेल अवीव (Tel Aviv) निर्माण स्थल पर काम कर रहे थे। जब हमास ने 7 अक्टूबर को इज़राइल पर हमला किया था। इसके जवाब में जब इजरायल (Israel) ने फिलीस्तीन (Palestine) पर हमला किया तो वो वहीं फंस गए, शहर से बाहर ही नहीं निकल पाए और ना अपने परिवार के पास पहुंच पाए। लेकिन हां वो फोन पर परिवार के संपर्क में रहते थे। अहमद का कहना है कि उनकी पत्नी फोन पर कहती थी कि वो और उनका परिवार कभी भी तबाह हो सकता, उन लोगों की सांसें कब थम जाएं...कुछ पता नहीं।
8 दिसंबर को हुई थी पत्नी से आखिरी बात
अहमद का कहना है कि 8 दिसंबर को हुई ये बातचीत उनकी पत्नी से हुई आखिरी बात थी। 8 दिसंबर की शाम को उनके चाचा के घर पर हवाई हमला हुआ। इस हमले में अहमद की पत्नी, 3 बेटियों, अहमद की मां, 4 भाई, चाचा-चाची. चचेरे भाई-बहन समेत 103 रिश्तेदारों के शरीर चीथड़े एक झटके में बम धमाके में उड़ गए। अहमद कहते हैं कि कुछ के शव को अब तक नहीं मिले हैं, कुछ के मलबे में दबे हैं। इस बात को तो अब दो महीने हो चुके हैं।
एक हफ्ते पहले ही छोटी बेटी का मनाया था जन्मदिन
अहमद कहते हैं कि बीते ही हफ्ते उन्होंने अपनी सबसे छोटी बेटी का जन्मदिन मनाया था। तब मुझे क्या पता था कि उनकी फूल सी बेटी के साथ ये हो जाएगा, वो जिंदा ही नहीं बचेगा, और ना उन्हें पापा कहने वाला कोई बचेगा। अहमद कहते हैं कि इजरायल और फिलीस्तीन के इस युद्ध ने उनका सब कुछ बर्बाद कर दिया। उनके जीवन में अब ऐसा कोई नहीं बचा, जिसके सहारे वो अपनी बची हुई जिंदगी गुजार लें। उन्हें इस बात का दुख है कि वो अपनों के शरीर को ढूंढ भी नहीं पा रहे हैं, ना ही उनका अंतिम संस्कार कर पा रहे हैं। उनकी जान से प्यारी उनकी फूल सी बेटियां भी किसी मलबे के ढेर में पड़ी होंगी। वो चाहकर भी उनके शवों को आखिरी बार देख तक नहीं पा रहे हैं। अहमद का कहना है कि उनकी ये बेटियां उनके जीवन में छोटी सी चिड़िया जैसी थीं, जो उनके जीवन को एक मीठी चहचहाहट से भरती थीं। जो अब बिल्कुल वीरान हो गया है।
कैसे हुआ हमला?
अहमद ने बताया कि जिस वक्त उनके परिवार पर हमला हुआ, तो एक मिसाइल उनके घर के मेन गेट पर गिरी। इसके बाद मेरा परिवार बाहर निकला और जल्दी से भागकर पड़ोस में रहने वाले उनके चाचा के घर चले गए, लेकिन 15 मिनट बाद ही एक फाइटर जेट उनके घर से टकरा गया। उनका ये घर गाज़ा के जिटौन में स्थित था । अहमद के एक रिश्तेदार जो जिंदा बच गए, उन्होंने कहा कि जब हमला शुरू हुआ तो वो पहाडी़ पर भागकर चल गए और वो लोग ही बचे, बाकी जो नहीं निकल पाए, वो मारे गए। उन्होंने कहा कि यहां पर हुए हमलों से पहले हमें कोई चेतावनी नहीं दी गई थी, ना कोई अलर्ट आया था, ये सब अचानक हुआ था। हमारा हंसता-खेलता परिवार एक झटके में ही एक भयानक मौत के साए में आकर बिखर गया।
इजरायली सेना ने आरोपों से पल्ला झाड़ा
बिना अलर्ट के इन हवाई हमलों के आरोपों पर जब इजरायली सेना से जानकारी ली गई तो उनका जवाब था कि उन्हें इस हमले के जानकारी नहीं थी और इजरायल के रक्षा बलों ने हमले को वैसे ऑपरेट किया जिससे आम नागरिकों की कम से कम हानि हो।
Published on:
27 Feb 2024 12:58 pm
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