
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में ईरानी प्रतिनिधिमंडल (Photo - Video Screenshot from @Iran_in_India)
भारत (India) में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में शामिल होने के लिए ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। साथ ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के कुछ ऑब्ज़र्वर भी आए हैं। ईरान (Iran) की तरफ से राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान (Masoud Pezeshkian), विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) समेत अन्य मंत्री/अधिकारी भी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आए हैं। आज ब्रिक्स की मीटिंग के दौरान ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने ईरान-अमेरिका युद्ध के विषय में बात करते हुए बड़ा बयान दिया।
ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने कहा, "टिकाऊ सुरक्षा राष्ट्रीय संप्रभुता के पूरे सम्मान और कुछ लोगों के लिए सुरक्षा और दूसरों के लिए असुरक्षा वाले मॉडल को खारिज करने पर निर्भर करती है। पड़ोसी देशों को धमकाने के लिए किसी देश की ज़मीन का गलत इस्तेमाल न होने देना एक अटूट सिद्धांत है। ब्रिक्स को आम लोगों के बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति का विरोध करना चाहिए।"
पेज़ेशकियान ने कुछ मुख्य पहलुओं पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा, "शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं को हमलों और खतरों से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। एकतरफा और अमानवीय प्रतिबंधों का मुकाबला करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाना ब्रिक्स सदस्यों की प्राथमिकता है। ब्रिक्स को न्याय की आवाज़ बनना चाहिए। ब्रिक्स सदस्यों की यह ज़िम्मेदारी है कि वो आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों को सामान्य मानने की प्रवृत्ति का विरोध करें, क्योंकि इन जगहों पर कोई भी कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। फिलिस्तीन का मुद्दा और फिलिस्तीनी लोगों के आत्म-निर्णय के अधिकार का समर्थन करना वैश्विक शासन की विश्वसनीयता और वैधता की एक गंभीर परीक्षा है और इसके लिए ब्रिक्स को सक्रिय भूमिका निभाने की ज़रूरत है।"
पेज़ेशकियान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त ब्रिक्स री-इंश्योरेंस कंपनी बनाने का प्रस्ताव भी दिया। उन्होंने कहा, "साथियों, ईरान का एक और खास प्रस्ताव है कि 10 बिलियन डॉलर की शुरुआती पूंजी के साथ एक संयुक्त ब्रिक्स री-इंश्योरेंस कंपनी बनाई जाए। इसका मकसद बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी प्रोजेक्ट्स के जोखिमों को कवर करना और प्राइवेट सेक्टर का भरोसा बढ़ाना है।"
Updated on:
12 Sept 2026 05:56 pm
Published on:
12 Sept 2026 05:56 pm
