19 मई 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

NATO Big Move : ईरान युद्ध में नया मोड़, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जुलाई से पहले सेना उतारने की तैयारी में नाटो

Escalation :मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच नाटो (NATO) ने जुलाई से पहले हॉर्मुज स्ट्रेट में अपनी सेना तैनात करने की बड़ी योजना बनाई है, जिससे ईरान युद्ध का पूरा समीकरण बदलने के आसार हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

MI Zahir

May 19, 2026

Strait of Hormuz Firing Dispute

Strait of Hormuz Firing Dispute (Image: ANI)

Deployment : नाटो की नई रणनीतिक हलचल ने मिडिल ईस्ट के शक्ति संतुलन को पूरी तरह हिला कर रख दिया है। वैश्विक कूटनीति और सैन्य मामलों से आ रही बड़ी खबरों के अनुसार, ईरान के साथ जारी विवाद के बीच उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) ने एक बड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाने का फैसला किया है। ताजा इनपुट्स के मुताबिक, नाटो आगामी जुलाई महीने से पहले ही रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी सेनाओं को उतारने की अंतिम तैयारी में जुट गया है। पश्चिमी देशों के इस साहसिक कदम को ईरान-अमेरिका टकराव के बीच एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है।

यहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार गुजरता है

सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाटो की सीधी एंट्री से इस पूरे क्षेत्र में युद्ध की लपटें और तेज हो सकती हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की लाइफलाइन माना जाता है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार गुजरता है। ईरान लंबे समय से इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर इसे ब्लॉक करने की धमकियां देता रहा है। ऐसे में नाटो का जुलाई की समयसीमा से पहले यहां सैन्य जमावड़ा करना, ईरान की नौसैनिक आक्रामकता को सीधे तौर पर कुचलने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

इसके पीछे गहरे आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण भी छिपे हुए हैं

इस संभावित सैन्य तैनाती के पीछे सिर्फ सुरक्षा का हवाला नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण भी छिपे हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर और हॉर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों ने यूरोपीय देशों और अमेरिका की चिंताएं बढ़ा दी थीं। नाटो के इस कदम को ईरान के सहयोगी देशों, जैसे रूस और चीन के लिए भी एक कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। यदि जुलाई से पहले यहाँ पश्चिमी देशों के घातक युद्धपोत और विशेष बल तैनात होते हैं, तो ईरान के पास अपनी सीमाओं के भीतर ही सिमटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।

संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक शांति संगठनों की भी चिंता बढ़ गई

फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया भर के रक्षा मंत्रालयों की नजरें टिकी हुई हैं। युद्ध के इस नए मोड़ से संयुक्त राष्ट्र सहित वैश्विक शांति संगठनों की भी चिंता बढ़ गई है। जानकारों का कहना है कि अगर हॉर्मुज की लहरों पर नाटो और ईरानी सेना का आमना-सामना होता है, तो यह केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह जाएगा, बल्कि यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी साबित हो सकता है। आने वाले हफ्ते इस बात की दिशा तय करेंगे कि मिडिल ईस्ट शांति की ओर बढ़ेगा या बारूद के ढेर पर तब्दील हो जाएगा।

अब अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों में खलबली मच गई है

इस खबर के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनयिकों में खलबली मच गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने नाटो के इस कदम को 'खुला उकसावा और संप्रभुता का उल्लंघन' करार दिया है। वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक व्यापार की सुरक्षा के लिए हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय ताकतों की मौजूदगी समय की मांग है।

पेंटागन भी इस क्षेत्र में अपने सैन्य बेस को हाई अलर्ट पर रख सकता है

आगामी दिनों में नाटो के सदस्य देश ब्रुसेल्स में एक आपातकालीन बैठक करने जा रहे हैं, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट में भेजे जाने वाले युद्धपोतों की संख्या और 'रूल्स ऑफ एंगेजमेंट' (सैन्य कार्रवाई के नियम) को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही, पेंटागन भी इस क्षेत्र में अपने सैन्य बेस को हाई अलर्ट पर रख सकता है।