
नेपाल के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स (HoR) के नए स्पीकर डोल प्रसाद अर्याल। (फोटो: ANI)
Dol Prasad Aryal : अब नेपाल के हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स (HoR) के नए स्पीकर बन गए हैं। रविवार दोपहर को काठमांडू के राष्ट्रपति भवन 'शीतल निवास' में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्होंने अपने पद और गोपनीयता की शपथ ली। नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने उन्हें यह शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, अर्याल ने स्पीकर कार्यालय पहुंच कर अपना कामकाज संभाल लिया है।
डोल प्रसाद अर्याल को इस अहम पद के लिए निर्विरोध चुना गया है। शुक्रवार को हुई नामांकन प्रक्रिया में वे एकमात्र उम्मीदवार थे। रविवार को संसद की बैठक के दौरान, सदन के वरिष्ठ सदस्य अर्जुन नरसिंह केसी ने औपचारिक रूप से घोषणा की कि अर्याल को बिना किसी विरोध के चुन लिया गया है। अब बतौर स्पीकर, वे प्रतिनिधि सभा की सभी बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। उनके नेतृत्व में संसद का अगला सत्र सोमवार दोपहर 1 बजे से शुरू होगा।
साल 2026 के आम चुनावों में काठमांडू-9 सीट से शानदार जीत दर्ज करने वाले अर्याल निचले सदन के 10वें स्पीकर बने हैं। यह एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि पिछले 18 वर्षों में वह इस सर्वोच्च पद पर बैठने वाले पहले गैर-कम्युनिस्ट नेता हैं। उनकी यह नियुक्ति नेपाल की बदलती राजनीतिक दिशा की ओर एक बड़ा इशारा है।
अर्याल का जन्म 1974 में धाडिंग के मैदी में हुआ था। रोजगार की तलाश में वह 1992 में काठमांडू आ गए, जहां उन्होंने शुरुआत में एक रेस्टोरेंट में मजदूर के रूप में काम किया। अपनी मेहनत के बल पर बाद में वे टूरिस्ट गाइड बने। अनुभव और ज्ञान हासिल करने के लिए वे कुछ समय तक काम और पढ़ाई के सिलसिले में जापान में भी रहे। शिक्षा, पर्यटन और व्यापार के क्षेत्र में उनकी हमेशा गहरी रुचि रही है।
राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के गठन के बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। आरएसपी के संस्थापक केंद्रीय सदस्य बनने के महज साढ़े तीन साल के भीतर ही वह राज्य के चौथे सबसे बड़े पद, यानी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष तक पहुँच गए। संकट के समय में उन्होंने पार्टी के कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी। इससे पहले, वे दो बार नेपाल के श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री भी रह चुके हैं।
इस नियुक्ति को नेपाल की राजनीति में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आम जनता और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एक गैर-पारंपरिक और जमीन से जुड़े नेता के स्पीकर बनने से सदन की कार्यवाही में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी। सोमवार को दोपहर 1 बजे होने वाले संसद सत्र में अर्याल पहली बार आधिकारिक तौर पर सदन की अध्यक्षता करेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह सदन में विभिन्न दलों के बीच कैसे समन्वय बिठाते हैं।
अर्याल का एक रेस्टोरेंट मजदूर से लेकर देश के चौथे सबसे बड़े पद तक पहुंचना नेपाल के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है। यह साबित करता है कि लोकतंत्र में एक आम नागरिक भी अपनी मेहनत और दूरदृष्टि से राजनीति के शिखर तक पहुंच सकता है। 18 साल बाद गैर-कम्युनिस्ट नेता का स्पीकर बनना कम्युनिस्ट पार्टियों के गिरते प्रभुत्व को भी दर्शाता है। (इनपुट: ANI)
Updated on:
05 Apr 2026 08:25 pm
Published on:
05 Apr 2026 08:19 pm
