
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)
US-Iran conflict: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़ी गई जंग से अब अमेरिका की जनता परेशान नजर आ रही है। हाल के दिनों में युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत मिले थे, लेकिन समझौते की शर्तों को रिपब्लिकन नेताओं ने खारिज कर दिया। कई नेताओं ने चेतावनी दी कि ऐसा समझौता ईरान को पहले से ज्यादा मजबूत बना सकता है। ऐसे में अगर ईरान अपनी सख्त शर्तों पर कायम रहता है तो ट्रंप के लिए ऐसा रास्ता निकालना मुश्किल होगा, जिससे वे सम्मानजनक तरीके से युद्ध खत्म कर सकें।
अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने कई सर्वे किए, जिसमें पाया गया कि इस युद्ध से अमेरिकी जनता थक चुकी है और उसे उम्मीद भी नहीं है कि इसका कोई सकारात्मक परिणाम भी निकलेगा। सर्वे में लोगों का मानना है कि जंग खत्म होने के बाद भी अमेरिका को इससे कोई खास फायदा मिलने वाला है।
कई सर्वे में सामने आया है कि अमेरिका के ज्यादातर लोग अब जंग को खत्म होते देखना चाहते हैं। एक सर्वें में 61 प्रतिशत लोगों ने कहा कि अमेरिका को सैन्य कार्रवाई सीमित समय के भीतर खत्म कर देनी चाहिए। वहीं 52 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं भी होता, तब भी अमेरिका को युद्ध रोक देना चाहिए।
वहीं जनता को भरोसा नहीं है कि यह जंग ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर पाएगा। केवल 22 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यदि युद्ध पूरी तरह सफल होगा। वहीं आधे से ज्यादा लोगों को इस पर संदेह है।
अमेरिकी लोगों का मानना है कि इस युद्ध से आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है, मध्य-पूर्व में अस्थिरता और बढ़ेगी और अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय रिश्ते कमजोर हो सकते हैं। सबसे बड़ी चिंता ट्रंप की विश्वसनीयता को लेकर सामने आई है। एक सर्वे में सिर्फ 20 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें ईरान मुद्दे पर ट्रंप के फैसलों पर पूरा भरोसा है, जबकि करीब 59 प्रतिशत लोगों ने उन पर भरोसा न होने की बात कही।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होकर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है। ट्रंप ने इसे मध्य पूर्व में शांति और आर्थिक मजबूती के लिए जरूरी बताया। हालांकि पाकिस्तान ने ट्रंप को झटका देते हुए इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
पाकिस्तान का कहना है कि वह फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान से पहले इजरायल को मान्यता नहीं देगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उन लोगों के साथ कैसे बैठा जा सकता है जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता।
Updated on:
27 May 2026 11:02 am
Published on:
27 May 2026 11:01 am
