
Flags of USA and Niger
पश्चिम अफ्रीकी देश नाइजर (Niger) में पिछले साल 26 जुलाई को सेना ने राष्ट्रपति मोहम्मद बजौम (Mohamed Bazoum) को सत्ता से हटाकर गिरफ्तार कर लिया था और तख्तापलट करते हुए सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था। तख्तापलट के बाद से ही नाइजर में हालत पूरी तरह से बदल गए थे। तख्तापलट के बाद से ही नाइजर के कई देशों से संबंधों में भी काफी बदलाव आ गया था। फ्रांस (France) भी उन देशों में शामिल था और तख्तापलट से के बाद नाइजर की सेना फ्रांस के खिलाफ हो गई थी और फ्रेंच राजदूत के साथ ही सेना को भी देश से बाहर कर दिया गया था। अब लगता है कि नाइजर की सेना ने वेस्ट देशों से दूरी बनाने का फैसला ले लिया है। क्योंकि नाइजर की सेना का अगला टारगेट अमेरिका (United States Of America) की सेना है। हाल ही में नाइजर की सेना ने एक ऐसा फैसला लिया है जिससे उसके और अमेरिका के सैन्य संबंधों को बड़ा झटका लगा है।
नाइजर ने किया अमेरिकी सेना से समझौता खत्म
नाइजर की सेना, जो इस समय देश की सत्ता चला रही है, ने अमेरिका से सैन्य समझौता खत्म करने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत नाइजर की सेना ने अमेरिकी सेना को तुरंत देश छोड़ने के लिए भी कह दिया है। इस समय अमेरिका के करीब 650 सैनिक नाइजर में हैं जिन्हें अब नाइजर की सत्ताधारी सेना के कहने पर देश छोड़ना होगा।
ड्रोन बेस से धोना पड़ेगा हाथ
नाइजर में अमेरिका का एक बड़ा ड्रोन बेस भी है। इस ड्रोन बेस की वैल्यू करीब 100 मिलियन डॉलर्स है और इस बेस पर कई अटैक ड्रोन्स हैं। अमेरिका के कुछ विमान भी इस ड्रोन बेस पर है। ऐसे में नाइजर से अमेरिकी सेना के निकलने पर अमेरिका को इस ड्रोन बेस से हाथ धोना पड़ेगा। हालांकि अमेरिका अपने ड्रोन्स और विमान और इसके अलावा दूसरे हथियारों को ले जा सकता है, पर ड्रोन बेस को नहीं, जो अमेरिका के सबसे बड़े ड्रोन बेस में से एक है।
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Published on:
17 Mar 2024 11:41 am
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