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पत्नी “खैरियाह” के साथ सुकून से रहना चाहता था ओसामा

अमरीकी कार्रवाई में मारे जाने से छह महीने पहले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन एबटाबाद छोड़ कर किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में था जहां वह पत्नी "खैरियाह" और पुत्र "हमजा" के साथ सुकून से रह सके। 

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ramdeep mishra

May 22, 2015

osama bin laden

osama bin laden

अमरीकी कार्रवाई में मारे जाने से छह महीने पहले अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन एबटाबाद छोड़ कर किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में था जहां वह पत्नी "खैरियाह" और पुत्र "हमजा" के साथ सुकून से रह सके।

लादेन ने अपने मन की यह बातें खैरियाह को एक पत्र में लिखी थी। लादेन का यह पत्र अमरीका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय की ओर से बुधवार को जारी किए गए 103 दस्तावेजों में से एक है। लादेन ने अपने पत्र में खैरियाह से माफी मांगते हुए कहा था कि वह उसके तथा परिजनों के साथ नहीं रह पाने के लिए अपने पति को क्षमा कर दे।

पत्र में लादेन ने उसकी सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे दो कुवैती भाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि मैं सोचता हूं कि अब मैं उनसे अलग हो जाऊं लेकिन मुझे ऐसे किसी स्थान की तलाश करने में कुछ महीने का वक्त लग जाएगा जहां मैं, तुम, हमजा और उसकी पत्नी हमारे साथ रह सके।

उसने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि तुम इस स्थिति को समझोगी और पूरे परिवार के पुनर्मिलन के लिए अल्लाह से दुआ करोगी। पूरे परिवार के साथ रहने की लादेन की इच्छा तो पूरी नहीं हो सकी पर हां यह जरूर हुआ कि खैरियार एबटाबाद में अपने पति के साथ रहने आ गई। बाद में अमरीकी हमले में वह पकड़ी गई और उसे पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंप दिया गया।

खुफिया निदेशक के कार्यालय से जारी दस्तावेजों से पता चलता है कि लादेन अपने परिवार से मुहब्बत करता था और समय-समय पर उन्हें पत्र भी लिखा करता था। ईरान में छिप कर रह रही खैरियाह को उसने एक और पत्र लिखा था जिसमें उसने परिवार के साथ मिल कर रहने के लिए अपने प्रयासों का जिक्र किया था। साथ ही यह भी बताया था कि उसकी सुरक्षा कर रहे अबु अहमद अल कुवैती ने उसकी योजना को नकार दिया है।

लादेन ने उसे छिपा कर रखने में दोनों भाइयों को पेश आ रही मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा था कि अब वे बुरी तरह से थक-हार चुके हैं औ यहां से जाना चाहते हैं। इन दस्तावेजों में लादेन के बेटे हमजा के दो तथा उसकी मां का भी एक पत्र है जिसमें उसने कहा कि वह अपने पिता के पदचिह्नों पर चलना चाहता है।

हमजा का पत्र किसी ऐसे बच्चे के पत्र जैसा है जिसमें उसने अपने पिता से नौ वर्षों तक दूर रहने की पीड़ा व्यक्त की है। 13 वर्ष की छोटी सी उम्र में पिता से दूर हुए हमजा ने लिखा कि मुझे आज भी वह मंजर याद है जब मैने आपको आखरी बार देखा था। आप जैतून के पेड़ के नीचे खड़े थे, आपने हम सब को जपने वाली मालाएं दीं थीं इसके बाद आपने हमसे अलविदा कहा और हम वहां से चले गए उस वक्त हमें लगा कि हमारा शरीर ही हमारे साथ जा रहा जबकि हमारी आत्मा वहीं कहीं पीछे छूट गई है।

हमजा के पता ठिकाने के बारे में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है और इस बात के भी कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं कि लादेन को मारने के लिए अमरीका द्वारा किए हमले के वक्त वह उसी परिसर में मौजूद था।