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ईरान पर होने वाला है बड़ा हमला ? अमेरिकी अल्टीमेटम के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर क्यों भाग पहुंचे तेहरान

Diplomatic-Crisis: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के खतरों के बीच पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर अचानक आपातकालीन यात्रा पर तेहरान पहुंचे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध को टालने के लिए यह गोपनीय राजनयिक प्रयास तेज हो गए हैं।

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भारत

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MI Zahir

May 22, 2026

Pakistani Army Chief Asim Munir

पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर । ( Photo-ANI)

Asim Munir Tehran visit: मिडिल ईस्ट में तनाव इस समय अपने चरम पर पहुंच चुका है। एक तरफ जहां अमेरिका और ईरान के बीच बड़े टकराव की आशंका बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक कूटनीति के गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। इसी बेहद संवेदनशील माहौल के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर अचानक शुक्रवार को ईरान की राजधानी तेहरान के लिए रवाना हो गए। मुनीर का यह दौरा इतनी आनन-फानन में हुआ है कि इसने अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि वे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित जंग टालने और एक बड़े शांति समझौते की रूपरेखा तैयार करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए वहां पहुंचे हैं।

कूटनीतिक हलचल और पाकिस्तान की बड़ी भूमिका

जनरल आसिम मुनीर का यह तेहरान दौरा अकेले नहीं हो रहा है, बल्कि इससे ठीक पहले पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री (गृह मंत्री) मोहसिन नकवी पिछले तीन दिनों से तेहरान में ही डेरा डाले हुए थे। नकवी ने अपनी अघोषित ईरान यात्रा के दौरान वहां के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और कई शीर्ष अधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें की थीं। गृह मंत्री की इस खुफिया कूटनीति के तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख का तेहरान पहुंचना यह साफ संकेत देता है कि परदे के पीछे कोई बहुत बड़ा प्लान चल रहा है। दोनों देशों के मीडिया सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान इस समय वाशिंगटन और तेहरान के बीच की कड़वाहट को कम करने और एक दीर्घकालिक शांति समझौता कराने की कोशिशों में जुटा हुआ है।

डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और युद्ध का खतरा

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह सख्त बयान है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ बातचीत का समय अब बिल्कुल आखिरी मोड़ (बॉर्डर लाइन) पर आ चुका है। व्हाइट हाउस की तरफ से लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि यदि ईरान ने मौजूदा शांति प्रस्तावों पर लिखित सहमति नहीं जताई, तो उसे बेहद गंभीर सैन्य नतीजों का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका के इसी अल्टीमेटम ने ईरान पर मंडराते बड़े हमले के खतरे को सच साबित कर दिया है, जिससे बचने के लिए अब समय बहुत कम बचा है।

ईरान की आंतरिक राजनीति और सैन्य तैयारी

दूसरी तरफ, ईरान के भीतर भी इस संकट को लेकर खींचतान मची हुई है। तेहरान ने इस बातचीत को गंभीरता से लेते हुए अपनी राजनयिक टीम में बड़ा फेरबदल किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बकाई को बातचीत दल का आधिकारिक प्रवक्ता बनाया गया है, जबकि संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ को इस पूरे कूटनीतिक दल की कमान सौंपी गई है। इसके बावजूद, ईरान के भीतर मौजूद कड़े रुख वाले (हार्डलाइनर) धड़े अमेरिका पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका युद्ध विराम की आड़ में अपनी सेना को मजबूत कर रहा है। ईरानी कट्टरपंथियों ने धमकी दी है कि अगर उन पर हमला हुआ, तो वे ऐसा आक्रामक जवाब देंगे जिससे पूरा मिडिल ईस्ट दहल जाएगा।

आखिर क्या टल पाएगा बड़ा संकट ?

इस समय दुनिया के बहुत कम ऐसे देश हैं जिनके संबंध अमेरिकी प्रशासन और ईरानी नेतृत्व दोनों के साथ ठीक-ठाक हैं, और पाकिस्तान उन्हीं में से एक है। जनरल आसिम मुनीर इसी का फायदा उठाकर एक ऐसी आग को शांत करने की कोशिश कर रहे हैं जो अगर भड़की, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को तबाह कर देगी। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तानी सेना प्रमुख का यह 'मिशन तेहरान' अमेरिका के अल्टीमेटम के बीच शांति का कोई रास्ता निकाल पाता है या फिर मिडिल ईस्ट एक भीषण युद्ध की तरफ बढ़ जाएगा। ( इनपुट : ANI )