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आतंकवाद के खिलाफ किया प्रदर्शन तो पाकिस्तान में सेना ने बंद किया INTERNET

Pakistan: बड़ी संख्या में बलोच लोग रैली में शामिल हुए, जिसमें महिलाएं, बच्चे और पीड़ित परिवार भी थे, जो बलोच नरसंहार के खिलाफ विरोध किया>

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भारत

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Anish Shekhar

Feb 25, 2025

baloch people

बलोच मानवाधिकार संगठन, बलोच यकजेती कमिटी (बीवाईसी) ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने बलोच युवाओं की टारगेट किलिंग के बढ़ते मामलों के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शनों को बाधित करने की कोशिश की और इस दौरान पूरे क्षेत्र में इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई।

खुजदार के जेहरी इलाके में हुई ये रैलियां बीवाईसी द्वारा घोषित उन प्रदर्शनों का हिस्सा थीं, जो बलोच युवाओं की टारगेट किलिंग में वृद्धि के खिलाफ चलाए जा रहे हैं। बीवाईसी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "बीवाईसी जेहरी और आम जनता ने एक विरोध रैली का आयोजन किया। यह रैली हॉस्पिटल रोड से शुरू होकर अल्लाह वाला चौक तक जाने वाली थी। हालांकि, अर्धसैनिक बलों (एफसी) और तथाकथित डेथ स्क्वॉड सदस्यों ने सड़कों को अवरुद्ध कर रैली को आगे बढ़ने से रोक दिया। पूरे क्षेत्र में इंटरनेट भी बंद कर दिया गया।"

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बलोच नरसंहार के खिलाफ विरोध

बीवाईसी ने बताया कि इन बाधाओं के बावजूद, बड़ी संख्या में लोग रैली में शामिल हुए, जिसमें महिलाएं, बच्चे और पीड़ित परिवार भी थे, जो बलोच नरसंहार के खिलाफ विरोध जता रहे थे। संगठन ने पाकिस्तानी बलों द्वारा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के खिलाफ बाधाएं डालने, उत्पीड़न और हिंसा के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की और इसकी निंदा की। अपने पोस्ट में बीवाईसी ने कहा, "अपने अधिकारों के लिए सभा की स्वतंत्रता एक मूलभूत अधिकार है, और बलोच समुदाय चल रहे नरसंहार के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रतिरोध से कभी पीछे नहीं हटेगा।"

जबरन गायब हो रहे युवा

बीवाईसी ने रविवार को घोषणा की थी कि वह पाकिस्तान के सुरक्षा बलों द्वारा बलोच लोगों पर हो रहे "व्यवस्थित उत्पीड़न" की निंदा के लिए बलूचिस्तान भर में विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला आयोजित करेगा। संगठन ने उल्लेख किया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाइयों को तेज कर दिया है, जिसमें टारगेट किलिंग और जबरन गायब करने की घटनाएं बढ़ गई हैं। बीवाईसी के अनुसार, खुफिया एजेंसियां, सुरक्षा बल और संबद्ध मिलिशिया व्यवस्थित रूप से बलोच युवाओं को निशाना बना रहे हैं।

बलूचिस्तान कई समस्याओं से जूझ रहा है, जिसमें राज्य का दमन, जबरन गायबियां, और कार्यकर्ताओं, विद्वानों और नागरिकों की गैर-न्यायिक हत्याएं शामिल हैं। यह क्षेत्र आर्थिक उपेक्षा का भी शिकार है, जहां अपर्याप्त विकास, बुनियादी ढांचे की कमी और सीमित राजनीतिक स्वायत्तता की स्थिति बनी हुई है।