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यूएई ने क्यों छोड़ा 59 साल पुराना साथ? पूर्व भारतीय राजदूत ने बताई वजह, भारत को कैसे होगा फायदा

Navdeep Suri on UAE OPEC Exit: UAE के OPEC छोड़ने पर पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने अहम वजहें बताई हैं। इस फैसले से तेल बाजार और भारत पर क्या असर पड़ सकता है, जानें पूरी डिटेल।

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भारत

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Rahul Yadav

Apr 29, 2026

Navdeep Suri on UAE OPEC Exit

Navdeep Suri on UAE OPEC Exit (AI Image)

Impact of UAE leaving OPEC on India: तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बाहर निकलने के फैसले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में चर्चा बढ़ा दी है। हालांकि, कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। लंबे समय से चल रही रणनीतिक सोच का हिस्सा है। यूएई में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने इस फैसले के पीछे के कारणों और इसके संभावित प्रभावों पर अपनी राय दी है।

क्यों नाराज था यूएई?

पूर्व राजदूत नवदीप सूरी के अनुसार, यूएई की नाराजगी 2021 से ही सामने आने लगी थी। उस समय ओपेक ने यूएई का उत्पादन कोटा 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन तय किया था, जबकि उसकी उत्पादन क्षमता इससे अधिक थी। ऐसे में यूएई अधिक उत्पादन करना चाहता था, लेकिन ओपेक की सीमाएं उसके लिए बाधा बन रही थीं।

ओपेक से बाहर आने के बाद यूएई अब अपने उत्पादन को बाजार की जरूरतों के अनुसार अधिक लचीलेपन के साथ तय कर सकेगा।

सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात भी कारण

सूरी ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां भी यूएई के फैसले में एक कारक हो सकती हैं। उन्होंने संकेत दिया कि हाल के कुछ सालों में क्षेत्र में हुई घटनाओं ने यूएई की रणनीतिक सोच को प्रभावित किया है। हालांकि, इन मुद्दों पर अलग-अलग विश्लेषकों की राय अलग हो सकती है।

भारत को क्या हो सकता है फायदा

पूर्व राजदूत के अनुसार, इस फैसले से भारत को संभावित रूप से दो तरह के लाभ मिल सकते हैं।

पहला, अगर यूएई उत्पादन बढ़ाता है तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर दबाव आ सकता है। इसका फायदा भारत जैसे बड़े आयातक देशों को मिल सकता है।

दूसरा, भारत और यूएई के मजबूत संबंधों के चलते दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग और बढ़ सकता है।

गैर-तेल अर्थव्यवस्था पर ध्यान

यूएई लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से बाहर निकालने की दिशा में काम कर रहा है। सरकार का फोकस अब ऐसे सेक्टरों पर है जो भविष्य में स्थायी और विविध आय का स्रोत बन सकें। इसी रणनीति के तहत यूएई तेल से होने वाली कमाई को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फिनटेक, लॉजिस्टिक्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार जैसे क्षेत्रों में निवेश करने में लगा रहा है।

अबू धाबी और दुबई जैसे शहरों को ग्लोबल टेक और बिजनेस हब के रूप में विकसित करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए फ्री जोन, स्टार्टअप्स और विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ओपेक से बाहर निकलने के बाद यूएई को तेल उत्पादन और उससे होने वाली आय पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा, जिसे वह अपनी इस दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल कर सकता है।