18 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पाकिस्तान के परमाणु हथियार दुनिया के लिए खतरा, भारत से अच्छे रिश्ते भी हैं बड़ी चुनौती

पाकिस्तान में सेना हमेशा ताकतवर रही है और सत्ताधारी सरकार के हर निर्णय में उसका हस्तक्षेप रहता है। इमरान को लेकर भी ये धारण बन चुकी है कि सेना ने बीते दिनों हुए आम चुनावों में उनका साथ दिया इसलिए उनके लिए भी थोड़ी मुश्किल होगी।

3 min read
Google source verification
india, pakistan, atomic bomb, security, army, terrorist

पाकिस्तान के परमाणु हथियार दुनिया के लिए खतरा, भारत से अच्छे रिश्ते भी हैं बड़ी चुनौती

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पिछली सरकार के सबसे ताकतवर प्रशासक माने जाते थे, भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने की वजह से उन्हें आम चुनावों से दूर रहना पड़ा। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मसला तनातनी की प्रमुख वजह है। नवाज ने भारत से बेहतर रिश्ते स्थापित करने की कोशिश की लेकिन सीमा पर पाक सेना ने जैसी रणनीति भारत के खिलाफ अपनाई उसने उनकी सभी योजनाओं को धरासाई कर दिया।

पाकिस्तान जो दक्षिण एशियाई देशों का प्रमुख राष्ट्र है, क्या वे अपने पड़ोसी देशों के साथ स्थायी और अच्छे रिश्ते स्थापित कर पाएगा। खासतौर पर भारत के साथ जिसके साथ उसकी तल्खी समय के साथ बढ़ती जा रही है। इसको लेकर पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेता इमरान खान की अग्नि परीक्षा और शक्ति परीक्षण का दौर शुरू हो गया है।

पाकिस्तान में पिछले महीने हुए आम चुनावों के परिणामों ने दुनियाभर को चौंकाया। पाकिस्तान में दूसरे नंबर की विपक्षी पार्टी पीटीआई ने ‘न्याय’ को मोहरा बनाकर जो आंदोलन चलाया उसकी बदौलत उसे बड़ी जीत हासिल हुई। इसी का नतीजा है कि पाकिस्तानी क्रिकेट स्टार इमरान खान को देश की सत्ता संभालने का मौका मिला। हालांकि मैदान पर जीत की रणनीति बनाने वाले इमरान को राजनीति की पिच पर रणनीति बनाने का कोई तजुर्बा नहीं है। हालांकि विपक्षी पार्टियों की खुलेआम आलोचना ने इमरान को नई ताकत दी जिसकी बदौलत ये बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

घाटे में चल रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को दोबारा जीवित करना उनके लिए बड़ी चुनौती है। विदेशी मुद्रा के भंडारण में तेजी से गिरावट आने और व्यापारिक घाटा बढऩे से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था की स्थिति काफी गंभीर हुई है। ऐसी स्थिति में अब उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) से उम्मीद है जो उसे संकट से उबारने में मदद करेगा
परेशानी ये है कि कर्ज में डूबे पाकिस्तान पर चीन का कर्ज भी तेजी से बढ़ रहा है। चीन रणनीति के तहत पाकिस्तान में अपनी पैठ को व्यापार के रास्ते से बढ़ा रहा है। इसके लिए वे सडक़ों के निर्माण के साथ थर्मल पॉवर प्लांट (बिजली सयंत्र) लगाने का काम कर रहा है। पाकिस्तान में डै्रगन की ये चाल उसकी बेहद महत्वपूर्ण योजना (बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव) के लक्ष्य को पूरा करना है जिसे वे भविष्य के बड़े आर्थिक क्षेत्र के रूप में देख रहा है। उसे पूरा करने के लिए सभी तरह के षणयंत्र रचने में भी पीछे नहीं हट रहा है।

हालांकि पाकिस्तान के नए नेतृत्व ने ड्रैगन की इस चाल को खतरे और संदेह की नजर से देखना शुरू कर दिया है। क्योंकि चीन पाकिस्तान के गवादर में बंदरगाह बनाने का काम तेजी से कर रहा है। पाकिस्तान के नए शीर्ष नेतृत्व को इस बात की आशंका होने लगी है कि चीन कहीं इस बंदरगाह को एक मजबूत सैन्य ठिकाने के रूप में विकसित न कर ले जिससे भविष्य में पाकिस्तान के साथ उसके पड़ोसी मुल्क भी खतरे में आ जाएं। स्पष्ट कहें तो चीन पाकिस्तान में घुसपैठ कर दूसरे देशों पर हावी होने की योजना बना रहा है जिसमें वे कुछ हद तक सफल भी हो चुका है।

पाकिस्तान में सेना हमेशा ताकतवर रही है। सत्ता में रहने वाली सरकार के हर निर्णय में उसका हस्तक्षेप रहता है। खान को लेकर भी ये धारण बन चुकी है कि सेना ने बीते दिनों हुए आम चुनावों में उनका साथ दिया। इसलिए उनके लिए मुश्किल होगा कि वे सेना की रणनीति को नजरअंदाज करें क्योंकि सेना की ताकत तभी झलकती है जब पड़ोसी मुल्कों से उसकी तनातनी रहती है। पाक सेना को लेकर कहा जाता रहा है कि वे तालिबान का सहयोग करती है जो अफगानिस्तान के लिए काम कर रही है। अब पाकिस्तान की नई सरकार को देश के जनता की सुरक्षा के लिए विशेष रणनीति बनानी होगी। अमरीका से बातकर उसे तालिबानी आतंक को खत्म करना होगा।

पाकिस्तान के पास परमाणु हथियारों की उपलब्धता उसके पड़ोसी मुल्कों के साथ पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए खतरा है। परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर सरकार को नीति बनानी होगी जिससे वे किसी गलत हाथ में न जाएं। अमरीका और जापान भी पाकिस्तान की हर संभव मदद को तैयार हैं अगर वे पड़ोसी मुल्कों से अच्छे रिश्ते कायम करे।

वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत