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इमरान खान के ‘निर्दलीय’ लाएंगे बहुमत तो क्या पाकिस्तानी सेना चलने देगी सरकार, जानें पुराना इतिहास

Pakistan Election Result : पाकिस्‍तान के आम चुनाव परिणाम में पूर्व मुख्यमंत्री इमरान खान की पार्टी के समर्थकों को बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि इमरान की पार्टी सरकार बना सकती है।

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Pakistan Election Result 2024: पाकिस्‍तान के आम चुनाव परिणाम में पूर्व मुख्यमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के समर्थकों ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है। इन चुनाव में इमरान खान की पार्टी के निर्दलीय के रूप में उतरे उम्मीदवारों को एक बड़ी बढ़त मिलती नजर आ रही है। 100 से ज्‍यादा सीटों पर निर्दलीय प्रत्‍याशी अपना कमाल दिखा रहे हैं। चुनाव परिणामों से लग रहा है कि अब इ‍न निर्दलीय सांसदों की मदद से ही इमरान की पार्टी की सरकार बनेगी। लेकिन बड़ी बात यह है कि क्या पाकिस्तान में सेना के समर्थन के बिना कोई सरकार चल सकती है। यदि कोई चुनाव में जीत भी जाता है तो उसको पाकिस्तानी सेना के समर्थन की जरूरत पड़ती है। बिना सेना के समर्थन में पाकिस्तान में कोई भी सरकार देर तक टिक नहीं सकती।


सेना पर चुनाव में धांधली का आरोप

पाकिस्तान चुनाव आयोग के अनुसार, आम चुनाव परिणाम में इमरान खान के पक्ष को जीत मिलती नजर आ रही है। इमरान के समर्थक निर्दलीय 55 जगहों पर जीते चुके है, वहीं पीएमएल-एन को 43, पीपीपी को 35, पीएमएल को 1, एमक्यूएम-पी को 4 और जेयूआई-पी ने सिर्फ एक सीट पर जीत दर्ज की है। वहीं कुछ लोग ने पाक सेना पर आरोप लगाया है कि चुनाव में धांधली के लिए नतीजों में देरी की जा रही है।


बंटवारे का कारण बना था 1970 का चुनाव

इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता मिटिंग कर रहे हैं। चुनाव परिणाम में उनको चौंकाने वाले नतीजे मिल सकते है। ऐसी संभावना जताई जा रही है पाकिस्तान में एक बार फिर उसी प्रकार के हालात पैदा हो सकते है। साल 1970 के चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था। 7 दिसंबर 1970 को पाकिस्तान में आम चुनाव हुआ था। उस समय 300 सामान्य सीटों के लिए मतदान हुआ, जिनमें से 162 पूर्वी पाकिस्तान में और 138 पश्चिमी पाकिस्तान में थीं। इसमें 13 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं थी।

शेख मुजीब नहीं ले पाए पीएम की शपथ

1970 में शेख मुजीबुर्रहमान की अवामी लीग को जीत मिली थी। 162 सामान्य सीटों में से 160 पर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। वहीं पीपीपी ने केवल 81 सामान्य सीटें मिली। इसके बावजूद शेख मुजीब प्रधानमंत्री पद की शपथ नहीं ले पाए। क्योंकि सैनिक तानाशाह और राष्ट्रपति याह्या खान और पीपीपी अध्यक्ष जुल्फिकार अली भुट्टो बांग्लादेश के शेख मुजीब के पक्ष में नहीं थे। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में गृहयुद्ध हुआ और फिर पाकिस्तान का बंटवारा हो गया।

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