
पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अमेरिका के साथ लॉबिंग की। (फोटो: X Handle /@cozyduke_apt29)
FARA filings: पाकिस्तान ने भारत के ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को विफल करने के लिए अमेरिका में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। FARA दस्तावेजों के खुलासे ने साबित कर दिया है कि कैसे इस्लामाबाद ने ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) के करीबियों को करोड़ों रुपये देकर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की। ध्यान रहे कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रेल 2025 में हुए भयानक आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे, जिनमें से ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे। भारत ने इसे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद (India-Pakistan Conflict) का साफ संकेत माना और जवाब में मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। यह अभियान पाकिस्तान में छिपे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए था, जिससे आतंकवाद को जड़ से खत्म करने का संदेश गया। पाकिस्तान इस सैन्य कार्रवाई को रोकना चाहता था। इसके लिए इस्लामाबाद ने अमेरिका में भारी लॉबिंग (Pakistan Lobbying USA) शुरू कर दी। हाल ही में सामने आए अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों (FARA filings) से पता चलता है कि पाकिस्तानी राजनयिकों और अधिकारियों ने वाशिंगटन में तेजी से सक्रिय होकर दबाव बनाया।
पाकिस्तान के राजदूत और रक्षा अटैची ने अमेरिकी कांग्रेस, पेंटागन, विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सांसदों और बड़े मीडिया घरानों से संपर्क साधा। ईमेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत मीटिंग्स के जरिये 60 से ज्यादा संपर्क हुए। इनमें से 50 से अधिक बैठकें करने के लिए कहा गया। मुख्य मुद्दे कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, द्विपक्षीय रिश्ते और दुर्लभ खनिज थे। पाकिस्तान ने मीडिया से साक्षात्कार और बैकग्राउंड जानकारी भी हासिल करने की कोशिश की।
यह लॉबिंग अचानक नहीं थी। नवंबर 2025 में रिपोर्ट्स आईं कि पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से करीबी बनाने के लिए वाशिंगटन की कई लॉबिंग फर्मों के साथ करोड़ों रुपये के करार किए। अप्रेल-मई 2025 में लॉबिंग पर खर्च तीन गुना बढ़ गया। भारत की तुलना में पाकिस्तान ने कहीं ज्यादा पैसा बहाया। एक फर्म के माध्यम से पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में बैठक हुई, जिसे पाकिस्तान की अमेरिका में मजबूत पहुंच का प्रतीक माना गया।
पाकिस्तान का साफ मकसद अमेरिका पर दबाव डाल कर भारत के ऑपरेशन सिंदूर को कमजोर करना या रोकना था। वह चाहता था कि वाशिंगटन हस्तक्षेप कर युद्धविराम लागू करवाए। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा और भारत ने अपनी मजबूत स्थिति साबित की।
ये दस्तावेज पाकिस्तान की डिप्लोमेटिक और फाइनेंशियल ताकत दिखाते हैं। वह अमेरिकी सिस्टम में अपनी आवाज मजबूत करने के लिए लाखों डॉलर खर्च कर रहा है। यह भारत के लिए चेतावनी है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई सिर्फ सीमा पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी चलती है। यह खुलासा चौंकाने वाला है! पाकिस्तान ने पैसों की बरसात कर अमेरिका में भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिश की, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारत अब चुप नहीं बैठेगा।
एक अहम पहलू यह है कि पाकिस्तान की यह लॉबिंग उसी समय तेज हुई जब ट्रंप प्रशासन सत्ता में था। क्या यह ट्रेड डील्स या अन्य रियायतों से जुड़ा था? कई एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को अमेरिकी मीडिया में फिर से हाइलाइट करने की कोशिश की, लेकिन भारत की मजबूत डिप्लोमेसी ने इसे ज्यादा सफल नहीं होने दिया।
Updated on:
06 Jan 2026 01:27 pm
Published on:
06 Jan 2026 01:26 pm
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