
US President Donald Trump (Photo-ANI)
नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) पाने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) बेहद आतुर हैं। वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से किसी भी सूरत में पीछे नहीं रहना चाहते हैं, जैसे कि वह भी ओबामा की तरह दो बार राष्ट्रपति बन गए हैं, अब उन्हें भी दुनिया भर में शांति समझौता कराने के लिए नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए। ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल पीस प्राइज की उम्मीद जताई है।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर कहा कि मुझे कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और रवांडा गणराज्य के बीच संधि के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे भारत (India) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच युद्ध रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे सर्बिया और कोसोवो के बीच युद्ध रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुझे मिस्र और इथियोपिया के बीच शांति बनाए रखने के लिए शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा, मुझे अब्राहम अकॉर्ड के लिए शांति पुरस्कार नहीं मिलेगा।
दरअसल, रवांडा और कांगो ने अमेरिका में तीन दिन तक चली बातचीत के बाद एक समझौते पर साइन किया है। जिसमें हथियारों का इस्तेमाल छोड़ने, नॉन स्टेट आर्म्ड ग्रुप्स को समाप्त करने और रिफ्यूजी की घर वापसी शामिल है। पूर्वी कांगो में लंबे समय से संघर्ष जारी था। यहां कई हथियारबंद गुट प्राकृतिक संपदा पर कब्जा करने के लिए लड़ रहे थे। जनवरी में रवांडा समर्थित M23 विद्रोही गुट ने गोमा शहर पर कब्जा कर लिया था।
पाकिस्तान (Pakistan) ने अमेरिकी राष्ट्रपति का दिल खुश कर दिया है। फील्ड मार्शल आसीम मुनीर की राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद पाकिस्तानी सरकार ने ट्रंप को 2026 के नोबेल पीस प्राइज के लिए नोमिनेट किया है। पाकिस्तान ने कहा कि भारत-पाक सैन्य झड़प के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूनीतिक पहल और मध्यस्थता की। उन्होंने एक बड़े युद्ध को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। इससे दो न्यूक्लियर ताकत वाले देशों के बीच युद्ध की आशंका टल गई। पाक सरकार ने कश्मीर मसले पर ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश की भी सराहना की। कहा कि जब तक कश्मीर का हल नहीं निकलता, तब तक स्थाई शांति नहीं मिल सकती है।
Updated on:
21 Jun 2025 09:39 am
Published on:
21 Jun 2025 08:53 am

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