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ईरान-अमेरिका में समझौता कराने निकले थे पाक विदेश मंत्री, फिसलकर गिरे तो अधिकारियों के सामने हो गई

Pakistan Foreign Minister Fall: अमेरिका-ईरान युद्ध में शांति स्थापित करने के लिए…पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें सऊदी अरब, तुर्किए और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हुए। लेकिन इस कार्यक्रम के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि…

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भारत

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Saurabh Mall

Mar 29, 2026

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पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अचानक फिसलकर गिर पड़े (सोर्स: पत्रिका)

Pakistan Foreign Minister Latest Update: पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच शांति कराने वाले देश के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा था। इसी मकसद से इस्लामाबाद में एक बड़ी कूटनीतिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल हुए। माहौल गंभीर था और सबकी नजरें इस अहम बातचीत पर टिकी थीं।

लेकिन तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी चर्चा का फोकस बदल दिया। बैठक से पहले मेहमानों का स्वागत करते समय पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार अचानक फिसलकर गिर पड़े। यह घटना कैमरे में कैद हो गई और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। हालांकि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है।

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार का क्या है कहना?

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि ईरान अब पाकिस्तान के 20 जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देगा। यानी हर दिन दो जहाज इस अहम रास्ते से सुरक्षित निकल सकेंगे।

डार ने इसे शांति की दिशा में बड़ा कदम बताते हुए कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता बढ़ेगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि ऐसे फैसले दिखाते हैं कि बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का सही रास्ता है। अपनी बात को और मजबूत करने के लिए उन्होंने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पश्चिम एशिया के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी अधिकारी अराघची को भी टैग किया। कुल मिलाकर, डार का संदेश साफ था- तनाव के बीच भी बातचीत से ही हल निकल सकता है, और यही रास्ता आगे की शांति तय करेगा।

पाकिस्तान पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल

एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है। वजह है उसका ए क्यू खान नेटवर्क से जुड़ा पुराना रिकॉर्ड- यह वही नेटवर्क (ग्लोबल न्यूक्लियर स्मगलिंग चेन) था जिसने ईरान, लीबिया और नॉर्थ कोरिया जैसे देशों को परमाणु तकनीक पहुंचाई थी।

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जब पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ (गार्डियन) के रूप में पेश कर रहा है- जैसे ईरान तक अमेरिका का प्रस्ताव पहुंचाने या बातचीत करवाने की कोशिश- तो क्या उस पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं।

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