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ऑपरेशन सिंदूर रोकने को लेकर पाकिस्तान ने ट्रंप के पर्सनल डॉक्टर की ली थी मदद, FARA में खुलासा

पाकिस्तान, भारतीय कार्रवाई की आशंका से डरा हुआ था। वह बार-बार व्हाइट हाउस में अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में जुटा था। इसी क्रम में उसने ट्रंप के पर्सनल डॉक्टर तक अपनी पहुंच बनाई थी।

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Donald Trump with Shehbaz Sharif and Asim Munir

पाक पीएम शहबाज शरीफ और पाक सेनाध्यक्ष असीम मुनीर के साथ डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- IANS)

अमेरिका के फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के दस्तावेज सार्वजनिक हुए हैं। इसके मुताबिक पिछले साल अप्रैल में भारत के चलाए ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान सहम गया था। पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बार-बार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास जाकर जंग रोकने की गुहार पहुंचा था। इसके कारण पाकिस्तान ने ट्रंप के पुराने निजी डॉक्टर रॉनी जैक्सन के जरिए सैन्य संघर्ष रोकने की गुहार लगाई थी। इसके बाद रॉनी जैक्सन ने पाकिस्तान और ट्रंप के बीच माइंस और रेयर अर्थ्स डील को पक्का करने में भी अहम भूमिका अदा की थी।

रावलपिंडी ने वाशिंगटन से संपर्क बढ़ाने के दिए थे निर्देश

सार्वजनिक दस्तावेज के अनुसार, पाकिस्तान को पहलगाम हमले के बाद अंदेशा हो गया था कि भारत इस बार बड़ा कदम उठाने वाला है। इसके बाद पाकिस्तानी सरकार और सैन्य प्रशासन ने वाशिंगटन में मौजूद अपने अधिकारियों को अमेरिकी सरकार के साथ संपर्क बढ़ाने के निर्देश दिए थे।

पाकिस्तान के दो हायर किए गए लॉबिस्ट जेवलिन एडवाइजर्स LLC और कॉन्शियस पॉइंट कंसल्टिंग की फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट (FARA) के तहत डिपार्टमेंट ऑफ़ जस्टिस के साथ फाइलिंग से पता चलता है कि जैक्सन ने पहलगाम टेरर अटैक के ठीक एक हफ़्ते बाद 1 मई को पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ रेयर अर्थ्स डील पर एक इन-पर्सन मीटिंग की थी।

इसके बाद 6 मई को उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित टकराव पर टेलीफोन पर बात की, क्योंकि नई दिल्ली ने 6-7 मई की दरमियानी रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। ट्रम्प प्रशासन तक तेजी से पहुंच बनाने, व्यापार और कूटनीतिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए 6 लॉबिंग फर्मों पर करीब ₹45 करोड़ खर्च किए थे।

संघर्ष विराम के बाद 16 मई को पाकिस्तान और अमेरिका के बीच डील को आगे बढ़ाने के लिए डिनर मीटिंग तय करने के लिए एक कॉल किया गया था। इस दौरान बातचीत जारी रही। 28 मई को बातचीत फाइनल हुई और MoU वाला ड्राफ्ट इमेल आया। फिर जैक्सन को जेवलिन के ज़रिए 'रेयर अर्थ्स डेवलपमेंट और प्रपोज़्ड MoU' पर एक और कॉल और टेक्स्ट मैसेज आए। यह डॉक्यूमेंट अगले कुछ महीनों तक US सिस्टम में घूमता रहा, जिसमें सितंबर में US स्ट्रेटेजिक मेटल्स और पाकिस्तान के फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइज़ेशन के बीच $500 m की डील हुई।

कौन है रॉनी जैक्सन?

रॉनी जैक्सन एक रिटायर्ड नेवी डॉक्टर हैं, जोकि जॉर्ज डब्ल्यू बुश के दिनों से व्हाइट हाउस मेडिकल यूनिट में पोस्टेड थे। वह बराक ओबामा के फिजिशियन थे और ओबामा के एक कुत्ते द्वारा काटे गए एक लड़की का इलाज करने के लिए भी सुर्खियों में आए थे। फिर, वह अपने पहले टर्म के दौरान ट्रंप के फिजिशियन बने रहे। वह पूरी तरह से ट्रंप कैंप में शामिल हो गए। उन्होंने ट्रंप का लॉयल्टी तब जीता जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए उन्होंने ट्रंप की हेल्थ का सपोर्ट किया। जैक्सन ने कांगो-रवांडा डील साइन करने में भी लॉबिंग की थी।

भारतीय दूतावास ने भी लॉबिंग एजेंसी की मदद ली

FARA में दी गई जानकारी के भारतीय दूतावास ने भी लॉबिंग एजेंसी की मदद ली। दूतावास ने व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के रिकी गिल से संपर्क कराने में मदद ली। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमारी सारी जानकारी वेबसाइट पर मौजूद है। हम बहुत पहले से ऐसी एजेंसियों की मदद लेते आ रहे हैं।