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कंगाल पाकिस्तान की मदद के लिए फिर आगे आया सऊदी अरब, देगा 83,700 करोड़

पाकिस्तान की कंगाल स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कर्ज़ के बोझ तले पाकिस्तान दबा हुआ है। ऐसे में अब एक बार फिर पाकिस्तान की मदद करने के लिए सऊदी अरब आगे आया है।

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भारत

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Tanay Mishra

Apr 15, 2026

Shehbaz Sharif and Mohammed bin Salman Al Saud

Shehbaz Sharif and Mohammed bin Salman Al Saud

कंगाल पाकिस्तान (Pakistan) काफी समय से आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझ रहा है। देश की आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है और यह बात किसी से भी छिपी नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूटी हुई है और देश कंगाली से जूझ रहा है। साथ ही पाकिस्तान में महंगाई भी बहुत बढ़ गई है जिससे जनता भी परेशान है। कंगाली और बेहद कमज़ोर अर्थव्यवस्था के साथ ही पाकिस्तान कर्ज़ में भी डूबा हुआ है। देश में काफी कोशिशों के बावजूद भी हालात नहीं सुधर पा रहे हैं और अभी भी कंगाली छाई हुई है। ऐसे में पाकिस्तान समय-समय पर आईएमएफ (इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड – IMF) और अन्य मित्र देशों के आगे अपनी झोली फैलाते रहता है। अब पाकिस्तान की मदद के लिए उसका एक और मित्र देश फिर से आगे आया है।

सऊदी अरब देगा पाकिस्तान को 83,700 करोड़

पाकिस्तान की मदद के लिए एक बार फिर सऊदी अरब (Saudi Arabia) आगे आया है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद (Mohammed bin Salman Al Saud) ने पाकिस्तान को 3 बिलियन डॉलर्स (करीब 83,700 करोड़ पाकिस्तानी रूपए) की वित्तीय सहायता देने का फैसला लिया है।

क्या है उद्देश्य?

बताया जा रहा है कि सऊदी अरब से मिलने वाली धनराशि पाकिस्तान के स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में जमा की जाएगी। यह वित्तीय सहायता पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार को मज़बूत करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए दी जा रही है।

पाकिस्तान पर यूएई के दबाव के चलते सऊदी अरब ने की मदद?

सऊदी अरब ने यह फैसला ऐसे समय में लिया है जब पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात - यूएई (United Arab Emirates - UAE) को 3 बिलियन डॉलर्स का उधार चुकाना है। यूएई ने हाल ही में इस पुराने उधार को रोल ओवर करने से इनकार कर दिया था, जिससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया था। ऐसे में सऊदी अरब ने इस कमी को पूरा करने के लिए तुरंत पाकिस्तान की मदद करने का फैसला लिया। गौरतलब हैं कि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से मज़बूत रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच रक्षा समझौता भी हुआ है।