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PM Modi Indonesia Visit: प्रम्बानन मंदिर पहुंचे पीएम मोदी, जानें कैसे भारत की मदद से फिर से जीवित हुई यह विरासत

PM Mosi Visit Prambanan Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर में संरक्षण परियोजना की शुरुआत की। यह पहल भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत संरक्षण नीति का हिस्सा है, जिसके तहत 2014 से कई देशों में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार किया गया है।
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भारत

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Himadri Joshi

Jul 08, 2026

PM Modi visits Prambanan Temple

पीएम मोदी ने प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया (फोटो- एएनआई)

PM Mosi Visit Prambanan Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इंडोनेशिया के योग्याकार्ता स्थित ऐतिहासिक प्रम्बानन मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने करीब 1000 वर्ष पुराने इस विश्वप्रसिद्ध मंदिर परिसर के संरक्षण और पुनर्स्थापना परियोजना की शुरुआत की। यह पहल भारत और इंडोनेशिया के बीच हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत की एक्ट ईस्ट नीति का अहम हिस्सा

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रम्बानन मंदिर को दोनों देशों की साझा विरासत का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह स्मारक भारत और इंडोनेशिया के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का जीवंत प्रमाण है। यह परियोजना भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐतिहासिक और जन-संबंधों को मजबूत करना है।

इस परियोजना के तहत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल प्रंबानन मंदिर परिसर के भीतर स्थित कई छोटे मंदिरों के जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए इंडोनेशियाई अधिकारियों के साथ मिलकर काम करेगा।

प्रम्बानन मंदिर का महत्व एवं इतिहास

प्रम्बानन इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर योग्याकार्ता के पास स्थित दक्षिण पूर्व एशिया के सबसे बड़े हिंदू मंदिर परिसरों में से एक है। यह 1000 वर्ष से अधिक पुराना है। मूल रूप से 'शिवगृह' के नाम से जाना जाने वाला यह परिसर भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश को समर्पित है। इस मंदिर की दीवारों और पत्थरों पर रामायण के दृश्यों को बेहद खूबसूरती से उकेरा गया है। इसके मुख्य प्रांगण में आज भी रामायण का प्रसिद्ध नृत्य-नाट्य मंचित किया जाता है।

इस परिसर की सबसे प्रमुख संरचना 47 मीटर ऊंचा शिव मंदिर है, जिसके उत्तर में ब्रह्मा मंदिर और दक्षिण में विष्णु मंदिर स्थित हैं। यह मंदिर परिसर रामायण के इंडोनेशियाई संस्करण को दर्शाने वाली जटिल पत्थर की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है। इसे दक्षिणपूर्व एशिया में शास्त्रीय हिंदू वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरणों में से एक माना जाता है।

सदियों से भूकंपों, ज्वालामुखी विस्फोटों और राजनीतिक उथल-पुथल के कारण मंदिरों को व्यापक क्षति हुई है। बावजूद इसके 1918 से पारंपरिक पत्थर जोड़ने की तकनीकों और आधुनिक इंजीनियरिंग विधियों, दोनों का उपयोग करके जीर्णोद्धार के प्रयास जारी हैं। परिसर के भीतर कई संरचनाओं को संरक्षण की आवश्यकता है। यूनेस्को ने प्रम्बानन मंदिर परिसर को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दी। इस स्थल को 1998 में इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सांस्कृतिक संपत्ति भी घोषित किया गया था।

2014 से साझा विरासत बचाने का अभियान

भारत ने 2014 के बाद एशिया के कई देशों में साझा सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई है। वियतनाम के यूनेस्को सूचीबद्ध माई सन मंदिर परिसर का पुनरुद्धार, श्रीलंका के तिरुकेथीश्वरम मंदिर का संरक्षण, म्यांमार के बागान पुरातात्विक क्षेत्र में भूकंप से क्षतिग्रस्त स्मारकों की मरम्मत और नेपाल में 28 सांस्कृतिक स्थलों के पुनर्निर्माण जैसी परियोजनाएं इसी अभियान का हिस्सा हैं। इसके अलावा बहरीन के श्रीनाथजी मंदिर, बांग्लादेश के रामना काली मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण में भी भारत ने वित्तीय और तकनीकी सहयोग दिया।