
ऑस्ट्रेलिया में नए सरकारी कार्यस्थल कानूनों के तहत ऑस्ट्रेलियाई राजनेताओं पर बुरे आचरण के लिए उनके वेतन का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है या उन्हें संसद से निलंबित किया जा सकता है। सत्तारूढ़ लेबर पार्टी ने बुधवार को एक स्वतंत्र संसदीय मानक आयोग (आइपीएससी) की स्थापना के लिए नया विधेयक पेश किया, ताकि बुरे आचरण में लिप्त राजनेताओं और कर्मचारियों पर नकेल कसी जा सके। आइपीएससी को पहली बार 2021 में सरकार के सेक्स डिस्क्रिमिनेशन कमिश्नर की एक रिपोर्ट में प्रस्तावित किया गया था, जिसमें पाया गया था कि राष्ट्रमंडल संसदीय कार्यस्थलों (सीपीडब्ल्यू) में काम करने वाले 33 प्रतिशत लोगों ने यौन उत्पीड़न की कम से कम एक घटना का अनुभव किया था और 37 प्रतिशत को बदमाशी का सामना करना पड़ा था।
आइपीएससी को आचरण संहिता लागू करने, कार्यस्थल पर जांच करने तथा संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों, उनके कर्मचारियों और संसदीय कार्यस्थलों पर अन्य कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार होगा। यदि किसी वर्तमान या पूर्व राजनेता द्वारा गंभीर कदाचार किया गया पाया जाता है, तो आयोग उन पर उनके वार्षिक मूल वेतन का पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाने या संसद से निलंबित करने की सिफारिश कर सकता है।
ऐसे मामलों में जहां कथित व्यवहार आपराधिक आचरण की श्रेणी में आता हो, आइपीएससी को जांच करने की अनुमति होगी, लेकिन किसी भी निष्कर्ष को आपराधिक दोष नहीं माना जाएगा। यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच केवल तभी की जाएगी जब शिकायतकर्ता सहमति दे। पूरी प्रक्रिया गोपनीय रहेगी लेकिन यदि आयुक्त किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के खिलाफ प्रतिबंधों की सिफारिश करते हैं तो इसे सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।
देश में वर्ष 2001 में ऐतिहासिक 'सेट द स्टैंडर्ड' रिपोर्ट ने संसदीय कार्यस्थलों पर बदमाशी, यौन उत्पीड़न और यौन हमले के गंभीर मुद्दों को उजागर किया है। रिपोर्ट तब तैयार की गई जब पूर्व सरकारी कर्मचारी ब्रिटनी हिगिंस ने फरवरी 2021 में सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि मार्च 2019 में संसद भवन में उनके एक सहकर्मी ने उनके साथ बलात्कार किया था। अदालत ने अप्रेल 2024 के अपने फैसले में पुष्टि करते हुए कहा कि हिगिंस का बलात्कार उनके साथी राजनीतिक कर्मचारी ब्रूस लेहरमैन ने किया था।
Updated on:
22 Aug 2024 11:44 am
Published on:
22 Aug 2024 08:18 am
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