
पोप लियो XIV। ( फोटो: ANI)
Easter Urbi et Orbi: वेटिकन सिटी में ईस्टर के खास मौके पर पोप लियो XIV ने दुनिया भर से एक बड़ी और अहम अपील की है। उन्होंने पश्चिम एशिया और अन्य जगहों पर चल रहे युद्धों को तुरंत रोकने का आग्रह किया है। पोप ने साफ शब्दों में कहा कि जिनके हाथों में हथियार हैं, वे उन्हें नीचे रख दें । यह समय हिंसा और वर्चस्व की लड़ाई छोड़कर शांति की राह पर चलने का है। उन्होंने जोर दिया कि असली शांति ताकत और खौफ से नहीं, बल्कि आपसी बातचीत और संवाद के जरिये ही आ सकती है।
अपने संबोधन में पोप ने ईसा मसीह के फिर से जीवित होने की घटना को मौत पर जीवन की, अंधेरे पर रोशनी की और नफरत पर प्यार की बड़ी जीत बताया। उन्होंने सरल भाषा में समझाया कि ईसा मसीह का पुनरुत्थान हमें सिखाता है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां सभी को न्याय, आजादी और शांति मिले। इंसान को एक-दूसरे से भाई-चारे के साथ रहना चाहिए। हमें डर या झूठ का सहारा लेने के बजाय उम्मीद का दामन थामना चाहिए।
दुनिया भर में चल रहे युद्धों के कारण होने वाली हजारों मौतों और तबाही पर गहरी चिंता जताते हुए पोप ने एक बड़ी कड़वी सच्चाई सामने रखी। उन्होंने कहा कि हम लोग अब हिंसा और खून-खराबे के आदी होते जा रहे हैं। लोग दूसरों के दुख-दर्द को देखकर भी अनदेखा कर रहे हैं। उन्होंने इसे 'उदासीनता का बढ़ता वैश्वीकरण' कहा और जोर दिया कि सच्ची शांति केवल युद्ध रुकने से नहीं आएगी, बल्कि यह तब आएगी जब इंसानों के दिलों में दूसरों के लिए करुणा, सम्मान और दया का भाव होगा।
बुराई को ताकत से नहीं बल्कि प्रेम और भगवान पर भरोसे से हराने का संदेश देते हुए, पोप ने संत ऑगस्टीन का हवाला दिया कि हमें मौत से डरने के बजाय पुनरुत्थान और जीवन से प्यार करना चाहिए। अपनी शांति की अपील को अमली जामा पहनाने के लिए पोप लियो XIV ने 11 अप्रैल (शनिवार) को सेंट पीटर बेसिलिका में एक विशेष 'शांति प्रार्थना सभा' की घोषणा की है। उन्होंने पूरी दुनिया के लोगों को आमंत्रित किया है कि वे युद्ध और नफरत को खत्म करने के लिए इस प्रार्थना में एकजुट हों। इधर दुनिया भर के शांति समर्थकों, मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न धर्मगुरुओं ने पोप लियो XIV के इस स्पष्ट और कड़े संदेश का स्वागत किया है। इसे मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया जा रहा है।
बहरहाल अब पूरी दुनिया की नजरें 11 अप्रैल को वेटिकन में होने वाली विशेष शांति प्रार्थना सभा पर टिकी होंगी। देखना यह है कि इस पहल में कितने देश और वैश्विक नेता अपनी भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। इधर पश्चिम एशिया में चल रहे भारी तनाव और अन्य अंतरराष्ट्रीय युद्धों के बीच, पोप का यह संदेश कूटनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। यह विश्व की महाशक्तियों पर हथियारों की होड़ छोड़कर शांति वार्ता की मेज पर लौटने का एक बड़ा नैतिक दबाव बना सकता है।
Updated on:
05 Apr 2026 09:53 pm
Published on:
05 Apr 2026 09:52 pm
