
Pope Election 2025: नवनिर्वाचित पोप फ्रांसिस वर्ष 2013 में जब सेंट पीटर्स बेसिलिका की बालकनी से श्रद्धालुओं का अभिवादन करने के लिए आए, तो उन्होंने मजाक में कहा था कि कार्डिनल्स एक नए पोप की तलाश में दुनिया के दूसरे कोने तक जाना पड़ा। उनका इशारा दक्षिण अमेरिका के धुर दक्षिण में स्थित उनके गृह देश अर्जेंटीना की ओर था। दुनिया के 1.4 अरब ईसाइयों का प्रतिनिधित्व करने वाले फ्रांसिस यूरोप के बाहर से आने वाले पहले पोप थे। दुनिया के अंतिम छोर से पोप चुने जाने का जो सफर 2013 में शुरू हुआ था, माना जा रहा है कि वह 2025 में भी जारी रह सकता है। कई जानकार 2025 के पोप के चुनाव को इसी रूप में देख रहे हैं कि क्या चर्च की सत्ता के केंद्र में रोम और यूरोप रह सकेंगे या नहीं।
इसका कारण उन आंकड़ों में छुपा है, जो कि खुद फ्रांसिस के शासनकाल में तेजी से बदलते गए। यूरोप की पॉलटिको मैग्जीन के अुनसार, अपने पोपत्व के दौरान फ्रांसिस ने पारंपरिक पश्चिमी सत्ता के आधार से बाहर से मतदान की आयु के 50 कार्डिनल नियुक्त किए हैं। इस तरह फ्रांसिस ने चर्च के भौगोलिक संतुलन को नाटकीय रूप से बदल दिया। यह संख्या मौजूदा करीब 135 मतदान योग्य कार्डिनल की संख्या की लगभग आधी है। फ्रांसिस ने लॉस एंजिल्स और सैन फ्रांसिस्को जैसे प्रमुख इलाकों के पादरियों को नजरअंदाज करते हुए सेंट लूसिया के छोटे कैरिबियन द्वीप में ब्रिजटाउन और इंडोनेशिया के दस लाख से कम आबादी वाले शहर बोगोर से पोप चुने।
पोप बेनेडिक्ट सोलहवें के इस्तीफे से स्तब्ध होने वाले कार्डिनल कॉन्क्लेव की प्राथमिकता थी कि कैसे यूरोप के सत्ता संघर्ष से दूर एक ऐसे धार्मिक लीडर का चुनाव किया जाए, जिसमें यौन और वित्तीय घोटालों से ग्रस्त संस्था का नेतृत्व संभालने के लिए पर्याप्त साहस हो और अपनी बात पूरी दुनिया तक पहुंचा सके। लेकिन फ्रांसिस की मृत्यु के बाद जब 7 मई को नए पोप चुनाव सम्मेलन के लिए कार्डिनल एकत्र होंगे तो अब वे एक गंभीर और ईसाइ जगत में एकता स्थापित व्यक्ति की तलाश में होंगे। जो फ्रांसिस की क्रांतिकारी शैली से हिल चुके संस्थान को एक साथ जोड़ सके और चर्च की केंद्रीय सरकार में स्थिरता ला सके।
पहली बार दौड़ में हैं एशियाई, अफ्रीकी, अमेरिकी कार्डिनल
इटली से आने वाले कार्डिनल पारोलिन
फिलीपींस से आने वाले कार्डिनल टैगले
अमरीका से आने वाले कार्डिनल प्रीवोस्ट
घाना से आने वाले कार्डिनल अम्बोंगो
आंकड़ों से साफ है कि पोप फ्रांसिस के कार्यकाल में यूरोप और अमेरिका वह इलाके रहे जहां से कार्डिनल्स की संख्या में 16 फीसदी की कमी आई है। वहीं, ग्लोबल साउथ के इलाकों से आने वाले पोप की संख्या 14 फीसदी बढ़ी है। इस तरह से यह पहला मौका है जबकि यूरोप के बाहर से 50 फीसदी के करीब कार्डिनल चुनाव में शरीक होंगे।
Published on:
05 May 2025 08:31 am
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