
Autism awareness day
आज यानी 2 अप्रैल को ऑटिज़्म अवेयरनेस डे है। ऑटिज़्म एक न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्या है और कई लोगों को लगता है कि इसका इलाज बेहद ही मुश्किल है, पर ऐसा नहीं है। ऑटिज़्म से जूझ रहे बच्चों में से 80% उचित खान-पान और कसरत से ठीक हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर ऑटिज़्मका सही समय पर निदान हो और डाइट-कसरत को सही तरीके से अपनाया जाए तो इस तरह के बच्चों में यह काफी प्रभावशाली साबित हो सकता है।
ऑटिज़्म के शेष 20% मामलों में दवाओं की ज़रूरत पड़ती है। हालांकि दवाओं की मदद से इस समस्या का समाधान संभव है।
होम्योपैथी के डॉ. केतन पटेल ने ऑटिज़्म अवेयरनेस डे पर बातचीत में बताया कि ऑटिज़्म में जेनेटिक, मेटाबोलिक और माइटोकॉन्ड्रियल कारण होते हैं, जिनका इलाज होम्योपैथी से संभव है। इसके साथ ही डाइट और एक्सरसाइज़ से बच्चों के जेनेटिक प्रभाव को 90% तक नियंत्रित किया जा सकता है। पश्चिमी देशों के प्रोटोकॉल सीमित परिणाम देते हैं, भारत को भी अपनी अनूठी उपचार पद्धति विकसित करनी चाहिए।
जेनेटिक और मेटाबोलिक रिसर्च विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉ. जयेश शेठ का कहना है कि ऑटिज़्म से पीड़ित बच्चे मंदबुद्धि वाले नहीं होते। उनके दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच वायरिंग में गड़बड़ी होती है, जो उनकी सोचने और बोलने की क्षमता को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान उपचार को और प्रभावी बनाती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार अमरीका में हर 31 बच्चों में से एक बच्चा ऑटिज़्म से पीड़ित होता है, जबकि भारत में यह अनुपात लगभग 100 में से एक है। इसका मतलब यह है कि भारत की तुलना में अमेरिका में इसका प्रकोप ज़्यादा है। हालांकि विकसित देशों में इस रोग वाले बच्चों के लिए अनूठी सुविधाएं भी हैं।
Updated on:
02 Apr 2026 09:22 am
Published on:
02 Apr 2026 09:21 am
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