
फीफा विश्व कप का पर्यावरण पर प्रभाव(फोटो-X/UTDKarra)
FIFA Football World Cup 2026 अब अपने चरम पर है और पूरी दुनिया इस खेल की खुमारी में डूबी हुई है। वहीं, दूसरी और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। दरअसल, खेलों का ये सबसे बड़ा आयोजन पर्यावरण पर भी असर डालेगा। विशेषज्ञों का दावा है कि अमरीका, कनाडा और मेक्सिको की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस विश्व कप का कार्बन उत्सर्जन 2022 के कतर विश्व कप की तुलना में दोगुने से भी अधिक हो सकता है। कार्बन अकाउंटिंग प्लेटफॉर्म ग्रीनली के आकलन के अनुसार, 48 टीमों वाले इस फीफा विश्व कप से लगभग 78 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हो सकती है। यह करीब 17 लाख कारों के एक साल के उत्सर्जन के बराबर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अब तक का सबसे प्रदूषणकारी फुटबॉल विश्व कप होगा।
चिंता की बात यह है कि कार्बन डाईऑक्साइड पृथ्वी के तापमान को लगातार बढ़ रही है। इससे पूरा जलवायु तंत्र बदल जाता है। बदला हुआ जलवायु तंत्र हीटवेव, बाढ़, सूखा, तीव्र बारिश जैसी मौसम की घटनाओं को अधिक शक्तिशाली बना देता है।
सूर्य की किरणें पृथ्वी पर आती हैं और पृथ्वी उन्हें इन्फ्रारेड रेडिएशन के रूप में वापस अंतरिक्ष में भेजती है। लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से वापस जाने वाली गर्मी का एक हिस्सा रोक लेती है। इसे ग्रीनहाउस इफेक्ट कहते हैं। इसी के कारण ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है और पृथ्वी के औसत तापमान में भी बढ़ोतरी होती है। इसी के कारण हीटवेव भी बढ़ती है।
1) 87 प्रतिशत उत्सर्जन सिर्फ हवाई यात्रा से
फीफा विश्व कप 2026 के दौरान प्रदूषण बढऩे की सबसे बड़ी वजह टीमों की लंबी और ज्यादा हवाई यात्रा है। रिपोर्ट के तहत, 87 प्रतिशत कार्बन डाईऑक्साइड का उत्सर्जन सिर्फ हवाई यात्रा से होगा। इसको इस तरह से समझिए…
-फीफा विश्व कप 2026 तीन देशों अमरीका, मैक्सिको और कनाडा के 16 शहरों में खेला जा रहा है। ऐसे में 48 टीमों, लाखों प्रशंसकों और सैकड़ों मीडियाकर्मियों को लंबी दूरी की हवाई यात्राएं करनी पड़ेंगी।
-एक जेट विमान की उड़ान प्रति यात्री सैकड़ों किलोग्राम कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित कर सकती है। जब लाखों यात्राएं जुड़ती हैं, तो कुल उत्सर्जन बहुत बड़ा हो जाता है।
-अभी तक हुए विश्व कप में अधिकांश स्टेडियम एक-दूसरे से अपेक्षाकृत कम दूरी पर थे। लेकिन ये विश्व कप वैंकूवर से मियामी तक फैला है और टूर्नामेंट करीब 4500 किलोमीटर के दायरे में खेला जा रहा है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट और बढ़ जाता है।
2) डिजिटल कार्बन फुटप्रिंट
यात्रा के अलावा प्रसारण, लाइव स्ट्रीमिंग, डेटा फीड और अरबों दर्शकों द्वारा मोबाइल, टीवी और अन्य उपकरणों पर मैच देखने से भारी मात्रा में ऊर्जा की खपत होती है। इससे भी पर्यावरण पर असर पड़ेगा। यूके के नेशनल एनर्जी सिस्टम ऑपरेटर के अनुसार, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के ग्रुप मैचों के दौरान बिजली की मांग में लगभग 600 मेगावाट तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई।
1) लाइव स्ट्रीमिंग और प्रसारण :
4के और 8के वीडियो स्ट्रीमिंग में भारी डेटा ट्रांसफर होता है। डेटा ट्रांसफर के लिए सर्वर और नेटवर्क लगातार चलते हैं। इससे बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
2) सोशल मीडिया गतिविधि :
मैचों के वीडियो, फोटो और रील्स अपलोड होंगी। अरबों पोस्ट, कमेंट और शेयर किए जाएंगे। इन सभी गतिविधियों के लिए डेटा सेंटरों को लगातार काम करना पड़ता है।
3) क्लाउट व डेटा सेंटर :
रिपोर्ट के तहत, बड़े डेटा सेंटर लगातार 24 घंटे संचालित होते हैं। उन्हें ठंडा रखने में भी बहुत ऊर्जा खर्च होती है। वहीं, एआई मॉडल चलाने और डेटा प्रोसेस करने में भारी कंप्यूटिंग शक्ति लगती है। इससे अतिरिक्त ऊर्जा की मांग पैदा होती है।
विश्व कप मुकाबले देखने के लिए दुनियाभर से करीब 60 लाख दर्शकों के अमरीका, मैक्सिको और कनाडा आने की संभावना है। इससे होटल और रिसॉट्र्स की ऊर्जा खपत बढ़ी है। साथ ही भोजन उत्पादन और परिवहन के अलावा प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य कचरे की मात्रा बढ़ी है
विश्व कप जैसे बड़े आयोजनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसे काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने इसके लिए कई उपाय सुझाए हैं।
1) हवाई यात्रा कम करना :
-टीमों और अधिकारियों के यात्रा कार्यक्रम को इस तरह बनाया जाए कि लंबी उड़ानें कम हों। जहां संभव हो, ट्रेन और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाया जाए।
2) नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग :
स्टेडियमों, फैन जोन और प्रसारण केंद्रों में सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग बढ़ाया जाए। इसके अलावा, अस्थायी डीजल जनरेटरों की जगह स्वच्छ ऊर्जा स्रोत अपनाए जाएं।
3) टिकाऊ स्टेडियम संचालन
स्टेडियम में एलईडी लाइटिंग का इस्तेमाल किया जाए। ऊर्जा दक्ष एयर कंडीशनिंग और कूलिंग सिस्टम बनाए जाएं। पानी की बर्बादी कम हो, इसके लिए बारिश के पानी के संचयन की व्यवस्था की जाए।
4) कचरा और प्लास्टिक कम करना
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगे। पुन: उपयोग योग्य कप, बोतलें और खाद्य पैकेजिंग का इस्तेमाल हो। स्टेडियमों में कचरे का अलग-अलग संग्रह और रीसाइक्लिंग की व्यवस्था हो।
5) कार्बन ऑफसेट कार्यक्रम
आयोजक वृक्षारोपण, वन संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश कर उत्सर्जन की भरपाई करने की कोशिश कर सकते हैं।
Published on:
21 Jun 2026 05:23 am
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