
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। (फोटो - IANS)
रूस ने दुनिया भर के सामने अमेरिका को आईना दिखा दिया दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने खुलकर कहा कि भारत और रूस के बीच संबंध को केवल तेल से परिभाषित नहीं कर सकते बल्कि यह विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है।
वहीं, यूएनजीए सत्र से इतर लावरोव ने मीडिया से भी बात की। उन्होंने रूसी तेल आयात करने के कारण अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ के बारे में एएनआई के सवाल पर कहा कि टैरिफ से भारत-रूस के बीच आर्थिक साझेदारी को कोई खतरा नहीं है।
लावरोव ने कहा कि पीएम मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपने साझेदार खुद चुनता है।
लावरोव ने कहा कि अगर ट्रंप के पास भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए कोई प्रस्ताव है, तो वे उस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं, चाहे अमेरिका कोई भी शर्त रखे।
लेकिन जब बात भारत और तीसरे देशों के बीच व्यापार, निवेश, आर्थिक, सैन्य, तकनीकी और अन्य संबंधों की होगी, तो भारत इस पर केवल संबंधित देशों के साथ ही चर्चा करेगा।
साथ ही, रूसी विदेश मंत्री ने भारत के पक्ष में यह भी कहा कि रूस भारत के राष्ट्रीय हितों का सम्मान करता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति का भी सम्मान करता है। दोनों देशों के बीच उच्चतम स्तर पर नियमित संपर्क बना हुआ है, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में मदद करता है।
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन में हालिया मुलाकात हुई थी। उन्होंने दोनों देशों के बीच घनिष्ठ समन्वय का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि दिसंबर में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा की योजना है। दोनों देशों के बीच व्यापक द्विपक्षीय एजेंडा है, जिसमें व्यापार, सैन्य, तकनीकी सहयोग, वित्त, स्वास्थ्य सेवा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता शामिल हैं।
Published on:
28 Sept 2025 07:57 am
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