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रूसी विदेश मंत्री का बड़ा खुलासा, भारत के खिलाफ साजिश का पर्दाफाश, रूस-भारत-चीन संबंधों पर बड़ा बयान

India China Relation: रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत, चीन और रूस के रिश्ते की वकालत करते हुए कहा कि ये तीनों देश ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं और पश्चिमी ताकतें नहीं चाहतीं कि ये देश मिलकर एक मजबूत ध्रुव बनें।

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भारत

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Devika Chatraj

May 30, 2025

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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव। (फोटो - IANS)

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक हालिया बयान में पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका, पर भारत और चीन के बीच तनाव बढ़ाने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। लावरोव ने कहा कि पश्चिम द्वारा गढ़ा गया 'इंडो-पैसिफिक' शब्द क्षेत्रीय राजनीति को चीन विरोधी बनाने और भारत-चीन जैसे पड़ोसी देशों के बीच तनाव को हवा देने का एक हथियार है।

भारत के साथ पुतिन

लावरोव ने अपने बयान में भारत, चीन और रूस के बीच एकता को मजबूत करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ये तीनों देश ऐतिहासिक रूप से एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं और पश्चिमी ताकतें नहीं चाहतीं कि ये देश मिलकर एक मजबूत ध्रुव बनें। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद तनाव बढ़ा हुआ है। इस हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की थी और आतंकवाद के खिलाफ भारत को पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया था।

मध्यस्थता के लिए तैयार लावरोव

लावरोव ने यह भी कहा कि रूस भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने में मध्यस्थता के लिए तैयार है। उन्होंने 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणा पत्र का हवाला देते हुए दोनों देशों से द्विपक्षीय बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की। रूस की यह पेशकश भारत और रूस के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है, जिसे हाल ही में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रूस यात्रा और पुतिन के साथ उनकी मुलाकात ने और मजबूत किया है।

वैश्विक स्तर पर हलचल

लावरोव के इस बयान ने वैश्विक मंच पर हलचल मचा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस का यह रुख न केवल भारत-चीन संबंधों को बेहतर करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि रूस, भारत और चीन मिलकर पश्चिमी दबदबे को चुनौती दे सकते हैं।

भारत-रूस संबंधों पर जोर

लावरोव के बयान ने एक बार फिर भारत और रूस की गहरी दोस्ती को रेखांकित किया है। हाल ही में रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी के निमंत्रण को स्वीकार करते हुए भारत यात्रा की घोषणा की है, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी।

चीन के साथ संबंधों में सुधार

भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में संबंधों में सुधार के संकेत दिखे हैं। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी की हालिया चीन यात्रा के बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाने का फैसला किया है। लावरोव का बयान इस दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस खुलासे ने वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। रूस की यह पहल क्या भारत, चीन और रूस के बीच एक नई त्रिकोणीय शक्ति को जन्म देगी, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।

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