
फोटो में पाक जनरल मुनीर और पीएम शहबाज (सोर्स: ANI और AI जनरेटेड इमेज)
Middle East Iran-Saudi Arabia Security Conflict: मिडिल ईस्ट में तनाव अब भी बरकरार है। एक तरफ ईरान लगातार यूएस और इजरायली सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल से अटैक कर रहा है। हाल ही में खबर सामने आई थी कि ईरानी हमले में इजरायल के लगभग 300 लोग घायल हुए हैं।
वहीं अमेरिका और इजरायल भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे हैं। वह लगातार ईरान पर अटैक कर रहे हैं। पिछले दिनों खबर सामने आई थी कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की तरफ अपने जंगी जहाज भेज रहा है, साथ ही वह यूरोपीय देशों से भी अपील कर रहा है कि आप भी अपने जंगी जहाज भेजें, हालांकि अब तक प्रेसिडेंट ट्रंप का अभी तक किसी यूरोपीय देश ने हामी नहीं भरी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा सवाल सबको परेशान कर रहा है कि आखिर क्यों पाकिस्तान इस युद्ध में चुप है, जबकि उसका वर्षों का साथी सऊदी अरब लगातार ईरानी हमलों का सामना कर रहा है?
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर और अहम ठिकानों पर बार-बार हमले हो रहे हैं, फिर भी पाकिस्तान की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। यह चुप्पी और भी हैरान करती है क्योंकि दोनों देशों के बीच रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता है। लंबे समय से सऊदी अरब ने आर्थिक और रणनीतिक रूप से पाकिस्तान की मदद की है, लेकिन आज जब जोखिम बढ़ गया है, तब इस्लामाबाद की खामोशी कई नए सवाल खड़े कर रही है कि क्या यह कूटनीति है या दबाव की रणनीति?
‘द यूरेशियन टाइम्स’ में लिखे एक लेख में सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने लिखा है कि दशकों से सऊदी अरब से वित्तीय और रणनीतिक मदद मिलने के बावजूद, पाकिस्तान ईरान को खुश करने में लगा हुआ है।
लेख में कहा गया है, "यह ध्यान देने लायक है कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच संबंध सात दशकों से भी ज्यादा पुराने हैं। इन वर्षों में सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सैनिकों की तैनाती एक संस्थागत व्यवस्था का रूप ले चुकी है। इसके अलावा, लाखों पाकिस्तानी नागरिक सऊदी अरब में काम करते हैं, जो इस्लामाबाद की विदेशी मुद्रा की कमाई में अहम योगदान देते हैं।"
‘द यूरेशियन टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से बार-बार हमले होने के बाद, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने चेतावनी दी है कि ईरान की बढ़ती आक्रामकता के सामने सऊदी अरब का संयम असीमित नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी भी खुला है। इसी बीच, अरब और इस्लामी देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर तेहरान से अपनी आक्रामकता रोकने की अपील की है।
Published on:
22 Mar 2026 09:23 pm
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