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होर्मुज स्ट्रेट से बारूदी सुरंगे नहीं हटाएगा जापान, चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी ने कहा अभी अंतिम फैसला नहीं

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा है। अमेरिका निगरानी बढ़ा रहा है, जबकि जापान ने माइनस्वीपर भेजने का फैसला टालते हुए कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है।

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भारत

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Himadri Joshi

Apr 13, 2026

Strait of Hormuz

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता जहाज (Image- IANS)

ईरान और अमेरिका में शांति वार्ता विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर से बढ़ने लगा है। इसके साथ ही होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी वैश्विक तनाव गहराता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु संवर्धन और समुद्री सुरक्षा को लेकर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। इसी बीच अमेरिका ने सोमवार से होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ी निगरानी रखने की घोषणा की थी जिसके बाद जापा ने माइनस्वीपर जहाज भेजने का फैसला फिलहाल के लिए टाल दिया है।

ईरान पर दबाव बना रहा अमेरिका

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद अमेरिकी नेतृत्व ने होर्मुज स्ट्रेट पर निगरानी और संभावित नाकेबंदी की चेतावनी दी है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जिससे रोजाना बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डाल सकता है। अमेरिका का यह कदम क्षेत्र में अपनी सामरिक पकड़ मजबूत करने और ईरान पर दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है।

अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया - जापान

जापान सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर सतर्क रुख अपनाया है। चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी मिनोरू किहारा ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट में माइन-स्वीपिंग अभियान के लिए समुद्री आत्मरक्षा बल की तैनाती पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि जापान स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे का फैसला हालात के अनुसार लिया जाएगा। किहारा ने दोनों पक्षों से अपील करते हुए कहा कि सुरक्षित समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना और तनाव कम करना इस समय सबसे जरूरी है। जापान ने कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हुए अमेरिका और ईरान के बीच संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।

पानी के भीतर छिपी माइंस का पता लगाते है यह जहाज

माइनस्वीपर विशेष प्रकार के नौसैनिक जहाज होते हैं, जो समुद्र में बिछी बारूदी सुरंगों को खोजकर निष्क्रिय करते हैं। ये जहाज अत्याधुनिक तकनीक की मदद से पानी के भीतर छिपी माइंस का पता लगाते हैं और उन्हें सुरक्षित रूप से हटाते हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही बाधित न हो। जापान के पास दुनिया की सबसे सक्षम माइनस्वीपिंग टीम मानी जाती है। उसकी समुद्री आत्मरक्षा बल आधुनिक अवाजी श्रेणी के एफआरपी जहाजों का उपयोग करती है, जो फाइबर-रिइन्फोर्स्ड प्लास्टिक से बने होते हैं और रडार की पकड़ से भी काफी हद तक बच सकते हैं। यह क्षमता होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।