
Quran burning
ईद-अल-अधा के अवसर पर स्वीडन (Sweden) के स्टॉकहोल्म (Stockholm) में कुरान (Quran) जलाए जाने का मामला सामने आया था। दुनियाभर में मुस्लिम देशों में इस घटना का पुरजोर विरोध हुआ था। उसके करीब महीने भर में ही डेनमार्क (Denmark) के कोपेनहेगन (Copenhagen) में भी कुरान जलाई गई। डेनमार्क में तो कुछ दिन के भीतर कुरान को जलाने के दो मामले सामने आए। कुरान के अपमान की इन घटनाओं से दुनियाभर के मुस्लिम देशों में नाराज़गी है। साथ ही इससे दोनों देशों में आंतरिक सुरक्षा पर खतरा भी बढ़ गया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों में एक बड़ा फैसला लिया गया है।
बढ़ाई गई बॉर्डर सुरक्षा
स्वीडन और डेनमार्क में कुरान को जलाए जाने की घटनाओं से दुनियाभर के मुस्लिम देशों की नाराज़गी साफ है और बिल्कुल भी छिपी नहीं है। स्वीडन और डेनमार्क भी स्थिति से अच्छी तरह से वाकिफ हैं और दोनों देशों को पता है कि यह एक खतरनाक स्थिति है और इससे दोनों देशों में आंतरिक सुरक्षा पर खतरा भी छाया हुआ है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों ने एक बड़ा फैसला लिया है। दोनों देशों ने अपनी-अपनी बॉर्डर पर सुरक्षा के इंतज़ाम पहले से ज़्यादा पुख्ता कर दिए हैं। पहले स्वीडन ने और उसके बाद डेनमार्क ने यह फैसला लिया है। डेनमार्क का यह फैसला 10 अगस्त तक जारी रहेगा।
क्या है वजह?
स्वीडन और डेनमार्क दोनों ही इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहते हैं कि उनकी बॉर्डर से कोई भी ऐसा व्यक्ति देश में प्रवेश न करे जिससे देश को खतरा हो सकता है। दोनों ही देश मामले की गंभीरता से वाकिफ हैं। स्वीडन और डेनमार्क में कुरान को जलाए जाने के विरोध में दुनियाभर के मुस्लिम देशों में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए। ऐसे में स्वीडन और डेनमार्क यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इन नाराज़ देशों से कोई भी ऐसा व्यक्ति स्वीडन या डेनमार्क की बॉर्डर पार न करे जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
Published on:
05 Aug 2023 01:24 pm
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