
Indian Prime Minister Narendra Modi gets congratulations from Taiwan President Lai Ching-te
लोकसभा चुनाव 2024 के परिणामों (Lok Sabha Election Results) ने बीजेपी (BJP) को 240 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनाया है और एनडीए (NDA) को 292 सीटों के साथ सबसे बड़ा गठबंधन। ऐसे में पीएम नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) तीसरी बार सरकार बनाने वाले हैं जो ऐतिहासिक है। पीएम मोदी ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Droupadi Murmu) को अपना इस्तीफा सौंप दिया है और वह 9 जून को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। पीएम मोदी की जीत की इस हैट्रिक पर उन्हें देशभर से बधाई मिलने के साथ ही विदेशों से भी बधाई मिल रही हैं। कई देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पीएम मोदी को उनकी ऐतिहासिक जीत की बधाई दे चुके हैं और अब लीडर्स में ताइवान (Taiwan) के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते (Lai Ching-te) भी शामिल हैं। पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई के लिए धन्यवाद दिया है, लेकिन इस बात से चीन (China) बौखला गया है।
ताइवान के राष्ट्रपति की बधाई पर पीएम मोदी ने दिया धन्यवाद
ताइवान के राष्ट्रपति चिंग-ते ने सोशल मीडिया पर पीएम मोदी को बधाई देते हुए लिखा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी चुनावी जीत पर मेरी ओर से हार्दिक बधाई। हम तेज़ी से बढ़ती ताइवान-भारत पार्टनरशिप को बढ़ाने, इंडो-पैसिफिक में शांति और समृद्धि में योगदान देने के लिए व्यापार, प्रौद्योगिकी और अन्य क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करने के लिए तत्पर हैं।"
ताइवान के राष्ट्रपति की बधाई पर जवाब देते हुए भारतीय प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, "आपके गर्मजोशी भरे संदेश के लिए धन्यवाद, लाई चिंग-ते। मैं दोनों देशों के घनिष्ठ संबंधों की आशा करता हूं क्योंकि हम पारस्परिक रूप से लाभप्रद आर्थिक और तकनीकी पार्टनरशिप की दिशा में काम करते रहेंगे।"
बौखलाया चीन
ताइवान के राष्ट्रपति के भारतीय पीएम को बधाई देने पर और भारतीय पीएम के इस बधाई का धन्यवाद देने पर चीन बौखला गया है। चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने इस पर विरोध जताते हुए कहा, "ताइवान में कोई राष्ट्रपति नहीं है। चीन ताइवान के अधिकारियों और चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों के बीच सभी प्रकार की आधिकारिक बातचीत का विरोध करता है। दुनिया में सिर्फ एक ही चीन है। ताइवान, चाइनीज़ गणराज्य का अविभाज्य हिस्सा है। चीन ताइवान को अपने एक विद्रोही प्रांत के रूप में देखता है जिसे फिर से चीन के साथ मिलाना ज़रूरी है भले ही इसके लिए शक्ति का इस्तेमाल करना पड़े। ऐसे में भारत को ताइवान के अधिकारियों की राजनीतिक चालों का विरोध करना चाहिए।"
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Updated on:
07 Jun 2024 02:54 pm
Published on:
07 Jun 2024 02:51 pm
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