
ईरान युद्ध में मिसाइलें। (फोटो: IANS)
ईरान युद्ध चरम पर है। ऐसी अटकलें हैं कि इस युद्ध में परमाणु का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसको लेकर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन पूरी तरह से सहम गया है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन की पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र की निदेशक (ईएमआरओ) हनान बाल्खी ने कहा है कि संगठन मिडिल ईस्ट में परमाणु अनहोनी की आशंका को ध्यान में रख अपनी तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के कारण विकिरण जोखिम से निपटने के लिए प्रोटोकॉल की समीक्षा की जा रही है।
दरअसल, पोलिटिको की रिपोर्ट में शीर्ष अधिकारी की चेतावनी का जिक्र किया गया है। इसमें उन्होंने कहा कि फिलहाल जो स्थिति है, उसमें सबसे बुरा कुछ हो सकता है तो वो एक परमाणु घटना है और यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात है।
रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य अधिकारी पिछली न्यूक्लियर आपदाओं से सबक लेते हुए रेडिएशन एक्सपोजर, बड़े पैमाने पर मौतों और लंबे समय तक चलने वाले पर्यावरण विध्वंस से निपटने के लिए प्रोटोकॉल का भी रिव्यू कर रहे हैं।
बाल्खी ने चेतावनी दी कि न्यूक्लियर घटना का असर सीमित क्षेत्र पर नहीं होगा बल्कि इसका असर दशकों तक कायम रहेगा। उन्होंने कहा- हम कितनी भी तैयारी कर लें, अगर ऐसा होता है और इसके नतीजे दशकों तक रहेंगे। इससे न सिर्फ संघर्ष रत इलाके में बल्कि दुनिया भर में तबाही मचेगी और ये दशकों तक रहेगा।
बता दें कि ईरान के न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सुविधाओं पर अमेरिका-इजराइल ने हमले किए हैं। इसको लेकर इंटरनेशनल एजेंसियों का कहना है कि अगर युद्ध में न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल नहीं भी किया जाता है, तो भी इससे रेडियोलॉजिकल घटना हो सकती है।
इस बीच, अमेरिका में न्यूक्लियर डिटरेंस एंड केमिकल एंड बायोलॉजिकल डिफेंस के असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ डिफेंस रॉबर्ट कैडलेक ने कहा कि अमेरिका की रणनीति एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है।
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि अमेरिका एक ही समय में दो परमाणु संपन्न देशों को रोकने की अनोखी चुनौती का सामना कर रहा है। मिलिट्री लीडर्स ने न्यूक्लियर, मिसाइल और स्पेस डोमेन में चीन और रूस से बढ़ते खतरों को लेकर चेतावनी दी है।
Published on:
19 Mar 2026 09:31 pm
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