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बांग्लादेश के धुरंधर ‘रहमान’ की डॉन की तरह ‘बुलेटप्रूफ’ एंट्री, बिल्ली भी साथ आई, रैली में उमड़े लाखों लोग

Homecoming: 17 साल का वनवास खत्म कर ढाका लौटे बीएनपी नेता तारिक रहमान का लाखों समर्थकों ने स्वागत किया। बुलेटप्रूफ काफिले और पालतू बिल्ली के साथ उनकी वापसी ने बांग्लादेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।

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भारत

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MI Zahir

Dec 25, 2025

Tariq Rahman Dhaka Entry

बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान 17 वर्षों बाद बांग्लादेश लौटे। (फोटो: X Handle)

Tariq Rahman Dhaka Entry: बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की आहट सुनाई दे रही है। बांग्लादेश में चुनाव की घोषणा (Bangladesh Election 2026) होने के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान करीब 17 वर्षों के लंबे स्वनिर्वासन के बाद आखिरकार अपने वतन लौट आए (Tarique Rahman Return Dhaka) हैं। ब्रिटेन से ढाका पहुंचे रहमान का स्वागत किसी फिल्मी नायक की तरह हुआ। एयरपोर्ट से लेकर रैली स्थल तक लाखों समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा, जिससे पूरा शहर 'बीएनपी मय' नजर आया। तारिक रहमान की यह वापसी बेहद खास रही। वे अकेले नहीं, बल्कि अपनी पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान, बेटी जैमा रहमान (BNP Leader Homecoming) और अपनी पालतू बिल्ली 'जीबू' के साथ लौटे। सुरक्षा के लिहाज से उनके लिए विशेष रूप से बुलेटप्रूफ गाड़ियां की व्यवस्था गई थी। जैसे ही वे एयरपोर्ट से बाहर निकले, समर्थकों के जोश ने ढाका की सड़कों पर ट्रैफिक थाम दिया। पालतू बिल्ली जीबू की मौजूदगी ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं, जिसे उनके करीबियों के साथ लाया गया था।

बीमार मां से मिलने पहुंचे अस्पताल

अपनी वापसी के तुरंत बाद रहमान ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। इसके पश्चात, वे सीधे एवरकेयर अस्पताल पहुंचे, जहां उनकी मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया पिछले एक महीने से भर्ती हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तारिक की वापसी के पीछे राजनीतिक कारणों के साथ-साथ उनकी मां का गिरता स्वास्थ्य भी एक बड़ा भावुक कारण है। अस्पताल के बाद उनका पूरा परिवार गुलशन स्थित अपने पुश्तैनी आवास 'फिरोजा' जाएगा।

फरवरी चुनाव और सत्ता की दावेदारी

तारिक रहमान की वापसी ने बांग्लादेश के आगामी आम चुनावों की सरगर्मी बढ़ा दी है। फरवरी में होने वाले चुनावों में वे प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदारों में से एक माने जा रहे हैं। 1991 के बाद से बांग्लादेश की सत्ता अक्सर खालिदा जिया और शेख हसीना के इर्द-गिर्द घूमती रही है। हाल ही में हुए छात्र आंदोलन और शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, बीएनपी के लिए सत्ता का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

राजनीतिक समीकरण और चुनौतियां

एक अंतरराष्ट्रीय सर्वे (IRI) के मुताबिक, बीएनपी आगामी संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर सकती है। हालांकि, देश के हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। छात्र नेता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के बाद उपजी हिंसा और अवामी लीग के विरोध को देखते हुए ढाका पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। तारिक रहमान के लिए असली चुनौती देश में स्थिरता लाना और अपनी पार्टी को चुनावी जीत दिलाना होगा।