पीटर क्नूपे ने चेतावनी दी कि तथाकथित खिलाफत भले ही समाप्त हो चुकी हो, लेकिन उसके निशान अभी भी पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों में मौजूद हैं। पीटर क्नूपे ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा हालात दाएश और जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन जैसे संगठनों के दोबारा उभार का कारण बन सकते हैं। उनके अनुसार, हथियारों का अनियंत्रित प्रसार, कमजोर शासन व्यवस्था, जनता में व्यापक असंतोष, मानवाधिकार उल्लंघन, दमनकारी नीतियां और अवसरवादी माहौल चरमपंथी संगठनों के पनपने के प्रमुख कारक हैं।