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ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव का फायदा उठा सकते हैं आतंकी संगठन, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य कार्रवाई से मिडिल ईस्ट में तनाव जारी है। इस तनाव का फायदा आतंकी संगठन उठा सकते हैं। एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 26 Apr 2026, 5:35 AM IST

ISIS terrorists

सांकेतिक इमेज

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हालिया सैन्य हमलों से क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने की आशंका है, जिसका लंबे समय तक फायदा आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट-खुरासान प्रांत (ISKP) उठा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान में बढ़ती अराजकता का असर केवल उस देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया, मध्य एशिया और वैश्विक सुरक्षा पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।

मिडिल ईस्ट तनाव से ISIS जैसे संगठनों को उभरने का मौका

इंडिया नैरेटिव के लिए लिखते हुए कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विशेषज्ञ पीटर क्नूपे ने कहा कि 2003 में अमेरिका के इराक पर आक्रमण के बाद अप्रत्यक्ष रूप से दाएश (ISIS) जैसे संगठनों के उभरने का रास्ता खुला था। इराक में सत्ता संतुलन बदलने के खिलाफ सुन्नी समुदाय के विरोध ने दुनिया भर से विदेशी लड़ाकों को आकर्षित किया।

पीटर क्नूपे ने चेतावनी दी कि तथाकथित खिलाफत भले ही समाप्त हो चुकी हो, लेकिन उसके निशान अभी भी पश्चिम एशिया, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न हिस्सों में मौजूद हैं। पीटर क्नूपे ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा हालात दाएश और जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन जैसे संगठनों के दोबारा उभार का कारण बन सकते हैं। उनके अनुसार, हथियारों का अनियंत्रित प्रसार, कमजोर शासन व्यवस्था, जनता में व्यापक असंतोष, मानवाधिकार उल्लंघन, दमनकारी नीतियां और अवसरवादी माहौल चरमपंथी संगठनों के पनपने के प्रमुख कारक हैं।

स्थानीय लोगों के गुस्से का फायदा उठाते हैं आतंकी संगठन

तनावपूर्ण माहौल में आतंकी समूह स्थानीय लोगों के गुस्से और निराशा का फायदा उठाकर भर्ती बढ़ाते हैं और हिंसा को फैलाते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान में बढ़ते तनाव और पहचान आधारित ‘हम बनाम वे’ की स्थिति ISKP के नेतृत्व के लिए सुनहरा अवसर साबित हो सकती है। इस संगठन के लिए शिया समुदायों, संस्थानों और प्रमुख व्यक्तियों पर लक्षित हमले करना आसान हो जाएगा। ISKP मुख्य रूप से अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय है, लेकिन ईरान के खुरासान क्षेत्र में भी अपनी जड़ें रखता है। पहले ही ईरान के अंदर कई हमले कर चुका है।

ISKP ने दी हमले की धमकी

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता संतुलन बिगड़ने से सुरक्षा वैक्यूम पैदा होगा, जिसका फायदा सुन्नी चरमपंथी समूह आसानी से उठा सकते हैं। इससे न केवल क्षेत्रीय स्तर पर सांप्रदायिक हिंसा बढ़ेगी, बल्कि भारत सहित पड़ोसी देशों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराएगा। यह स्थिति भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि ISKP पहले ही केंद्रीय एशिया और भारत में हमलों की धमकी दे चुका है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ईरान संकट के बाद उभरने वाले आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए पहले से ही समन्वित रणनीति तैयार करनी चाहिए। आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की दिशा में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।