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ब्रिटेन में पहले मुस्लिम गे जोड़े ने किया विवाह

ब्रिटेन की मीडिया के अनुसार वहां पर पहले मुस्लिम गे जोड़े ने विवाह रचा लिया। इन दोनों पुरुषों में से एक ने गे होने की ग्लानि से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय किया। 

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shachindra shrivastava

Jul 12, 2017

Muslim gay couple married

Muslim gay couple married

लंदन। ब्रिटेन की मीडिया के अनुसार वहां पर पहले मुस्लिम गे जोड़े ने विवाह रचा लिया। इन दोनों पुरुषों में से एक ने गे होने की ग्लानि से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की थी। इसके बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय किया।
जोड़े में से एक जाहेद चौधरी (24) मूल रूप से बांग्लादेश के हैं। उसका गे होना एक बुरे दौर जैसा है यह सोचकर उसके परिवार ने उसके साथ कुलकलंकी जैसा व्यवहार किया। उसके परिवार ने उसके यौन व्यवहार को बदलने के लिए उसे धार्मिक यात्रा पर भी भेजा।
उसके परिवार ने उसे परेशान किया और उसका मजाक उड़ाया। इससे परेशान होकर उसने 19 साल की उम्र में अपनी जान लेने की असफल कोशिश की। शॉन रोगन ने उसे एक बेंच पर रोते हुए पाया और बाकी सब अब इतिहास है। दोनों ने वालसाल रजिस्ट्री ऑफिस में एक सादे समारोह में विवाह कर लिया। कहीं तुम एलजीबीटी तो नहीं हो गए...
समाज में आज भी कई मुद्दे हैं जिनको जानना तो सभी चाहते हैं, लेकिन उन पर बात दबी ज़ुबान में करते हैं। समाज में कई लोग ऐसे होते हैं जिनकी पहचान लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर या समलैंगिक के तौर पर होती है। कई बार इनसे जुड़ी ख़बरें पढऩे को मिल जाती हैं।
मुकेश भारती नामक युवक ने आगे की पढ़ाई के लिए समाज के इस तबके पर पीचएडी करने की सोची। एलएलएम की पढ़ाई के बाद मुकेश ने लैंगिक समानता पर रिसर्च करने के लिए विश्वविद्यालय से अनुमति मांगी। एलजीबीटी कम्यूनिटी पर रिसर्च की शुरुआत से ही कुछ न कुछ ऐसा होता चला गया जिसकी कोई उम्मीद भी नहीं थी।

भला ये भी कोई रिसर्च टॉपिक है
एलजीबीटी यानी लेस्बियन, गे, बाईसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर लोगों तक विभिन्न मुद्दों को पहुंचाना, उनसे बात करना तो दूर मेरे अपने आसपास के लोगों ने ये कहना शुरू कर दिया कि भला ये भी कोई रिसर्च टॉपिक है। ये तो पागलपन है, दूसरी तरफ कॉलेज में दोस्त मिलते तो पूछते, और एलजीबीटी क्या हाल है? कहीं पर जाते हुए खाते-पीते हुए गे अक्षर पर ज्यादा जोर देना, जैसे वहां चलोगे... गे-गे-गे... क्या खाओगे... गे-गे-गे... क्या पीओगे... गे-गे... अरे कुछ बोलोगे... गे-गे... कहीं तुम एलजीबीटी तो नहीं हो गए...'। इतना ही नहीं लोग यहां तक कहने लगे जिसे सार्वजनिक रूप से भारत में कहना स्वीकार्य नहीं है। आम लोगों के विचार इस तरह से हो सकते हैं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल रहा। यहां तक कि घर के लोगों का भी ये कहना था कि ये लोग समाज की गंदगी हैं।