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खूंखार खालिस्तानी आतंकी निज्जर के लिए कनाडा की संसद में मौन, भारत ने दिया करारा जवाब

Canada: हाल ही में इटली में G-7 शिखर सम्मेलन में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारत के PM नरेंद्र मोदी की मुलाकात हुई थी। तब कनाडा की तरफ से बयान भी आया था कि भारत के साथ वो आगे काम करना चाहता है। इस बयान से ऐसा लगा था कि शायद अब कनाडा कि अकल ठिकाने आ गई है लेकिन बीते दिन कनाडा की संसद में जो हुई उसने इस गलतफहमी को दूर कर दिया।

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Tribute paid to Khalistani terrorist Hardeep Singh Nijjar in Canadian Parliament

Tribute paid to Khalistani terrorist Hardeep Singh Nijjar in Canadian Parliament

Canada: कनाडा का खालिस्तानियों के लिए प्रेम बढ़ता ही जा रहा है। अब कनाडा की संसद में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर (Hardeep Singh Nijjar) की हत्या का शोक मनाया गया। निज्जर के समर्थकों ने संसद के भीतर एक आतंकी के समर्थन में 2 मिनट का मौन रखा। बीते साल 18 जून को कनाडा में ही गुरुद्वारे के सामने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हाल ही में इटली में G-7 शिखर सम्मेलन (G-7 Summit 2024) में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और भारत के PM नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की मुलाकात हुई थी तब, कनाडा की तरफ से बयान भी आया था कि भारत के साथ वो आगे काम करना चाहता है। इस बयान से ऐसा लगा था कि शायद अब कनाडा की अकल ठिकाने आ गई है लेकिन बीते दिन कनाडा की संसद में जो हुआ उसने इस गलतफहमी को दूर कर दिया।

भारत ने दिया करारा जवाब

कनाडा की इस हरकत पर भारत ने भी उसे करारा जवाब दिया है। वैंकूवर में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने 1985 में एयर इंडिया कनिष्क उड़ान पर खालिस्तानी बमबारी के 329 पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक स्मारक सेवा की घोषणा की है और कहा कि "भारत आतंकवाद के खतरे का मुकाबला करने में सबसे आगे है और इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए सभी देशों के साथ मिलकर काम करता है। 23 जून 2024 को एयर इंडिया की उड़ान 182 (कनिष्क) पर कायरतापूर्ण आतंकवादी बमबारी की 39वीं वर्षगांठ है, जिसमें 329 निर्दोष पीड़ित हुए थे। नागरिक उड्डयन के इतिहास में सबसे जघन्य आतंकी-संबंधित हवाई आपदाओं में से एक में 86 बच्चों सहित, ने अपनी जान गंवा दी।"

कौन था हरदीप सिंह निज्जर

हरदीप सिंह निज्जर खालिस्तान आंदोलन से जुड़े भारतीय मूल का कनाडाई सिख अलगाववादी नेता था। भारत सरकार ने उसे आतंकवादी घोषित किया हुआ था। निज्जर आतंकी संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (Khalistan Tiger Force) से जुड़ा था। इसके अलावा वो कनाडा के वैंकूवर में गुरु नानक सिख गुरुद्वारा का अध्यक्ष था।

खालिस्तान से कैसे जुड़ा निज्जर?

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर का जन्म भारत के पंजाब के जालंधर के भार सिंह पुरा गांव में हुआ था। 1990 के दशक में निज्जर कनाडा चला आय़ा था, बस यहीं से वो भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देता था। यहीं पर उसने निज्जर खालिस्तान टाइगर फोर्स बनाई और इसमें युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी की ट्रेनिंग देता था और भारत से अलग सिखों के लिए अलग देश खालिस्तान की मांग करता। वो सिख फॉर जस्टिस से भी जुड़ा था। निज्जर ने खालिस्तान के ‘सिख रेफरेंडम 2020’ नाम का एक ऑनलाइन अभियान भी चलाया था। जिसके बाद एक मामले में उसकी पंजाब में संपत्ति जब्त कर ली गई।

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निज्जर की हत्या का कनाडा ने भारत पर लगाया है आरोप

खालिस्तान प्रेमी कनाडा को निज्जर के मरने पर बहुत दुख हुआ। कनाडा इतना ज्यादा भड़क गया कि उसने भारत पर ही निज्जर की हत्या का आरोप लगा दिया। हैरानी की बात ये है कि बीते साल निज्जर की हत्या के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो G-20 शिखर सम्मेलन 2023 में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। इसके बाद सितंबर महीने में उन्होंने अपनी संसद में बयान दिया कि निज्जर की हत्य़ा में भारत का हाथ है। भारत के एजेंट्स ने निज्जर की हत्या की है। हालांकि भारत ने कनाडा के इन आरोपों को एक सिरे से खारिज करता रहा है।

भारत ने खारिज किए आरोप, बिगड़े रिश्ते

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने कई मंचों से ये बात कही है कि खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या में भारत का कोई हाथ नहीं है और अगर कनाडा को ऐसा लगता है तो इसका कोई सबूत पेश करे। बता दें कि भारत पर हत्या का आरोप लगाने वाले कनाडा के पास इसका कोई सबूत नहीं है। कनाडा के बार-बार इस बात को दोहराने और आए दिन कनाडा में भारतीय दूतावास और दूसरे शहरों में होते खालिस्तानी प्रदर्शनों के चलते भारत से रिश्ते बेहद खराब हो गए।

इसी का नतीजा था जब लोकसभा चुनाव में NDA को जीत मिली तो कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भी प्रधानमंत्री मोदी को X पर बधाई संदेश पोस्ट किया था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसक जवाब 4 दिन बाद दिया था। वहीं हाल ही में जब इटली में हुए G-7 शिखर सम्मेलन हुआ था तब मोदी और ट्रू़डो की मुलाकात हुई थी। औपचारिक मेल-मिलाप के अलावा दोनों नेताओं के बीच कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं हुई।

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