
Donald Trump (Photo - Washington Post)
World Economic Forum: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की सालाना बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump Davos Live) ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में जहां अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती का बखान किया, वहीं यूरोप (US Europe Relations) को खरी-खरी सुनाते हुए ग्रीनलैंड डील (Greenland Crisis 2026) की अपनी मंशा को फिर से हवा दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के बीच उनके विमान 'एयरफोर्स वन' (Air Force One Problem) में आई तकनीकी खराबी ने भी सुरक्षा गलियारों (Arctic Security) में खलबली मचा दी है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कूटनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन तंज कसने से नहीं चूके। उन्होंने कहा, "मैं यूरोप से प्यार करता हूं, लेकिन वे सही दिशा में नहीं जा रहे हैं।" ट्रंप का इशारा यूरोपीय देशों की व्यापारिक नीतियों और जलवायु समझौतों की ओर था, जिसे वे अक्सर अमेरिका के हितों के खिलाफ बताते रहे हैं। उन्होंने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में अमेरिकी अर्थव्यवस्था इतिहास के सबसे मजबूत दौर में है, महंगाई पर लगाम लगी है और सीमाएं सुरक्षित हुई हैं।
दावोस के मंच पर सबसे ज्यादा चर्चा ग्रीनलैंड को लेकर रही। ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी 'रियल एस्टेट डील' करार दिया। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस बर्फीले क्षेत्र पर ट्रंप की नजर लंबे समय से है। उनके अनुसार, ग्रीनलैंड के पास मौजूद अपार प्राकृतिक संसाधन और इसकी भौगोलिक स्थिति अमेरिका को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। हालांकि, डेनमार्क और यूरोपीय संघ इसे अमेरिका की 'विस्तारवादी सोच' मान रहे हैं।
ट्रंप के दावोस आगमन से ठीक पहले ज्यूरिख के आसमान में सुरक्षा एजेंसियों की सांसें तब अटक गईं, जब राष्ट्रपति के विशेष विमान 'एयरफोर्स वन' में खराबी की खबर आई। विमान को आनन-फानन में सुरक्षित लैंड कराया गया। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इसे एक मामूली तकनीकी खामी बताया है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने सुरक्षित विमान में खराबी आना एक गंभीर जांच का विषय है।
ट्रंप की ग्रीनलैंड में दिलचस्पी सिर्फ जमीन के टुकड़े के लिए नहीं है। असल खेल 'आर्कटिक पॉलिटिक्स' का है। जलवायु परिवर्तन के कारण जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, आर्कटिक में नए समुद्री रास्ते खुल रहे हैं और छिपे हुए खनिज भंडार सामने आ रहे हैं। रूस और चीन पहले ही यहां पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं, ऐसे में ट्रंप इस क्षेत्र पर अमेरिकी नियंत्रण चाहते हैं ताकि सुपरपॉवर की रेस में वे सबसे आगे रहें।
यूरोपीय संघ: ट्रंप के "गलत दिशा" वाले बयान पर यूरोपीय नेताओं ने नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि ट्रंप वैश्विक सहयोग के बजाय संरक्षणवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।
डेनमार्क सरकार: डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है"। ट्रंप के दावोस भाषण को वहां की राजनीति में संप्रभुता पर हमला माना जा रहा है।
अर्थशास्त्री: जानकारों का मानना है कि ट्रंप का 'अमेरिका फर्स्ट' का नारा वैश्विक व्यापार के पुराने नियमों को बदल सकता है।
अमेरिकी वायु सेना अब एयरफोर्स वन में आई खराबी की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है ताकि भविष्य के दौरों में रिस्क कम किया जा सके।
अगले कुछ दिनों में ग्रीनलैंड के स्थानीय प्रशासन की ओर से ट्रंप के बयान पर एक बड़ा विरोध प्रदर्शन या आधिकारिक बयान आने की संभावना है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू यह है कि ट्रंप ने दावोस के मंच का इस्तेमाल अपने घरेलू चुनाव प्रचार के लिए भी किया। अपनी उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर गिनाकर वे अमेरिकी मतदाताओं को यह संदेश देना चाहते हैं कि दुनिया उनके फैसलों से प्रभावित है। विमान की खराबी को उनके समर्थक 'साजिश' के तौर पर पेश कर रहे हैं, जिससे उन्हें सहानुभूति मिलने की भी उम्मीद है।
Published on:
21 Jan 2026 07:44 pm
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