
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-ANI)
Donald Trump White House Speech: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सुर अब कुछ नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। जहां पिछले कुछ दिनों से ट्रंप लगातार ईरान को सख्त चेतावनी दे रहे थे, वहीं अब उन्होंने कहा है कि अगर बिना बमबारी के समाधान निकल जाए तो उन्हें खुशी होगी।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए सक्रिय कूटनीतिक पहल शुरू की है।
व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा कि चाहे यह फैसला राजनीतिक रूप से लोकप्रिय हो या नहीं, लेकिन वह दुनिया की सुरक्षा को खतरे में नहीं पड़ने देंगे।
ट्रंप ने कहा, “लोग कहते हैं कि यह फैसला लोकप्रिय नहीं है, लेकिन जब लोगों को पता चलेगा कि यह परमाणु हथियारों से जुड़ा मामला है, जो लॉस एंजिलिस जैसे बड़े शहरों को तबाह कर सकते हैं, तब वे समझेंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “यह लोकप्रिय हो या नहीं, मुझे यह करना ही होगा। मैं अपने कार्यकाल में दुनिया को तबाह नहीं होने दूंगा।”
इससे पहले ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमले को कुछ समय के लिए टाल दिया है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुछ अन्य देशों ने उनसे अनुरोध किया था कि सैन्य कार्रवाई को कुछ दिनों के लिए रोका जाए क्योंकि बातचीत के जरिए समाधान निकलने की संभावना बन रही है।
ट्रंप ने कहा, “मैंने हमले को थोड़े समय के लिए रोक दिया है। उम्मीद है कि शायद हमेशा के लिए। इन देशों का मानना है कि समझौते की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कई देश सीधे अमेरिकी अधिकारियों और ईरान के संपर्क में हैं और हालात को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
ट्रंप ने कहा, “अगर हम बिना बमबारी किए समाधान निकाल लेते हैं तो मुझे बहुत खुशी होगी। लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका पूरी तरह तैयार है।”
उनके इस बयान को हाल के दिनों में ईरान को लेकर दिए गए सबसे नरम बयानों में से एक माना जा रहा है।
इस बीच, अमेरिका में ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप सरकार की नीति पर सवाल भी उठ रहे हैं। CNN के ताजा औसत आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2026 में युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल केवल 36 प्रतिशत अमेरिकी ही उनके प्रदर्शन को समर्थन दे रहे हैं।
हालांकि ट्रंप अब भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता रहे हैं और इसे रोकना अपनी सरकार की प्राथमिकता मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की सक्रियता इस बात का संकेत है कि पूरा मध्य पूर्व किसी बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है। सऊदी अरब, कतर और यूएई लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बैक-चैनल बातचीत में भूमिका निभाते रहे हैं।
अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ती है या क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ता है।
Published on:
19 May 2026 11:05 pm
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