
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए उनके बड़े टैरिफ को रद्द कर दिया। इसको रिपब्लिकन ने नेशनल इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाले कानून के तहत लागू किया था। इस तरह, US की टॉप कोर्ट ने ट्रंप के अपने अधिकार के सबसे विवादित दावों में से एक को खारिज कर दिया, जिसका ग्लोबल इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ सकता है। शीर्ष कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दे दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के पास अभी एक विकल्प बचा है जो किसी ब्रह्मास्त्र से कम नहीं है। आइए जानते हैं इसके बारे में…
कंजर्वेटिव चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स के लिखे 6-3 के फैसले में जजों ने निचली अदालत के उस फैसले को सही ठहराया कि रिपब्लिकन प्रेसिडेंट का 1977 के इस कानून का इस्तेमाल उनके अधिकार से ज़्यादा था। रॉबर्ट्स ने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला देते हुए लिखा कि प्रेसिडेंट को टैरिफ लगाने की अपनी खास ताकत के दावे को सही ठहराने के लिए 'कांग्रेस से मिली साफ मंज़ूरी' दिखानी होगी। उन्होंने आगे कहा कि वह ऐसा नहीं कर सकते। इस फैसले से करीब 175-200 अरब डॉलर के टैरिफ रेवेन्यू पर असर पड़ेगा, और कई ट्रेड डील्स की समीक्षा हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने भले ही ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दे दिया है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के पास अभी तक विकल्प बचे हुए है।
1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम के तहत, राष्ट्रपति "राष्ट्रीय सुरक्षा" के आधार पर किसी भी आयातित वस्तु पर टैरिफ लगा सकते हैं। इसे अदालत में चुनौती देना कठिन होता है क्योंकि यह राष्ट्रपति के रक्षा संबंधी अधिकारों में आता है।
ट्रंप 1974 के व्यापार अधिनियम का उपयोग कर सकते हैं। यदि अमेरिका यह साबित कर देता है कि कोई देश (जैसे भारत या चीन) अमेरिकी सामानों के साथ भेदभाव कर रहा है, तो राष्ट्रपति उस देश के विशिष्ट उत्पादों पर भारी शुल्क लगा सकते हैं।
चूंकि कोर्ट ने कहा है कि टैक्स लगाने का अधिकार संसद (कांग्रेस) के पास है, ट्रंप रिपब्लिकन बहुमत वाली कांग्रेस से नया कानून पास करवा सकते हैं जो उन्हें सीधे टैरिफ लगाने का स्थायी अधिकार दे दे।
व्यापार घाटे को कम करने के लिए राष्ट्रपति 150 दिनों की अवधि के लिए 15% तक का आपातकालीन टैरिफ लगा सकते हैं, जिसे बाद में समीक्षा के लिए भेजा जा सकता है।
Updated on:
20 Feb 2026 10:43 pm
Published on:
20 Feb 2026 10:05 pm
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