scriptturkey pakistan in grey list what is FATF how it's works | कश्मीर पर पाक के सुर में सुर मिलाने वाले एर्दोगन को झटका, तुर्की भी ग्रे लिस्ट में हुआ शामिल, जानिए क्या होगा असर | Patrika News

कश्मीर पर पाक के सुर में सुर मिलाने वाले एर्दोगन को झटका, तुर्की भी ग्रे लिस्ट में हुआ शामिल, जानिए क्या होगा असर

पाकिस्तान और तुर्की पर यह कार्रवाई मनी लांड्रिंग एंड टेरर फंडिंग पर निगाह रखने वाले फाइनेंशियल फोर्स यानी एफ एटीएफ ने की है। आतंकियों के पनाहगाह बन चुके इन दोनों देशों को इस कार्रवाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। एफएटीएफ ने जहां पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। वहीं, पाकिस्तान के दोस् तुर्की को भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ ने इस ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया है।

 

नई दिल्ली

Published: October 22, 2021 07:36:28 am

नई दिल्ली।

कश्मीर में पाकिस्तान के साथ सुर मिलाने वाले तुर्की को जबरदस्त झटका लगा है। पाकिस्तान की राह पर चलने वाले तुर्की को भी एफ एटीएफ की ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया है। अब तुर्की और पाकिस्तान दोनों ही ग्रे लिस्ट में शामिल हो चुके हैं।
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पाकिस्तान और तुर्की पर यह कार्रवाई मनी लांड्रिंग एंड टेरर फंडिंग पर निगाह रखने वाले फाइनेंशियल फोर्स यानी एफ एटीएफ ने की है। आतंकियों के पनाहगाह बन चुके इन दोनों देशों को इस कार्रवाई से राहत मिलती नहीं दिख रही है। एफएटीएफ ने जहां पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में बरकरार रखा है। वहीं, पाकिस्तान के दोस् तुर्की को भी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी एफएटीएफ ने इस ग्रे लिस्ट में शामिल कर लिया है।
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एफएटीएफ प्रमुख मार्कस प्लेयर के अनुसार, पाकिस्तान अब भी अतिरिक्त निगरानी वाली ग्रे लिस्ट में मौजूद है। पाकिस्तान ने एफएटीएफ की 34 सूत्रीय एजेंडे में से 4 पर अबतक कोई काम नहीं किया है। यही नहीं, पाकिस्तान को अपनी हरकतों की वजह से जून 2018 से ही ग्रे लिस्ट में शामिल किया गया है। अक्टूबर 2018, 2019, 2020 और अप्रैल 2021 में हुई समीक्षा में भी पाक को राहत नहीं मिली थी। पाकिस्तान एफएटीएफ की सिफारिशों पर काम करने में विफल रहा है। इस दौरान वहां आतंकी संगठनों को विदेशों से और घरेलू स्तर पर आर्थिक मदद मिली है।
एफएटीएफ की ओर से ब्लैक लिस्ट में शामिल किए जाने पर पाकिस्तान को उसी श्रेणी में रखा जाएगा जिसमें ईरान और उत्तर कोरिया को रखा गया है। इसका मतलब यह हुआ कि वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों जैसे आईएमएफ और विश्व बैंक से कोई कर्ज नहीं ले सकेगा। इसके अलावा अन्य देशों के साथ वित्तीय डील करने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
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दरअसल, फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स एक अंतर-सरकारी निकाय है जिसे फ्रांस की राजधानी पेरिस में जी-7 समूह के देशों द्वारा 1989 में स्थापित किया गया था। इसका काम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग, सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसार और आतंकवाद के वित्तपोषण पर निगाह रखना है। इसके अलावा एफएटीएफ वित्त विषय पर कानूनी, विनियामक और परिचालन उपायों के प्रभावी कार्यान्वयन को बढ़ावा भी देता है। एफएटीएफ का निर्णय लेने वाला निकाय को एफएटीएफ प्लेनरी कहा जाता है। इसकी बैठक एक साल में तीन बार आयोजित की जाती है।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालियेपन की कगार पर है और ग्रे लिस्ट में रखे जाने पर उसकी इकॉनमी को और नुकसान होगा। इसकी वजह इंटरनैशनल मॉनिटरिंग फंड (आईएमएफ), विश्व बैंक और यूरोपीय संघ से आर्थिक मदद मिलना मुश्किल होगा। इससे जाहिर है उसकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
बता दें कि जून 2018 में ही FATF ने पाक को सबसे पहली बार ग्रे लिस्ट में डाला था। इसके तहत उसे टेरर फंडिंग और मनी लाउंड्रिंग पर ऐक्शन लेना था।

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