
बच्चे। फोटो सोर्स – Freepik
ब्रिटेन में 5 जनवरी से बच्चों की सेहत से जुड़ा बड़ा बदलाव लागू हो गया है। सरकार ने रात 9 बजे से पहले यानी दिन में टीवी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जंक फूड के विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
यह बैन उन खाद्य उत्पादों पर लागू होगा, जिनमें फैट, नमक और चीनी की मात्रा अधिक है। सरकार ने इसे बचपन के मोटापे के खिलाफ निर्णायक कदम बताया है।
इससे पहले सरकार मिल्कशेक, रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी और मीठे दही पेय जैसे प्री-पैकेज्ड उत्पादों पर शुगर टैक्स बढ़ा चुकी है। ब्रिटेन से पहले चिली बच्चों को लक्षित किए जाने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर लगभग पूरी तरह प्रतिबंध लगा चुका है, जिससे जंक फूड खपत में साफ गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, मेक्सिको ने चीनीयुक्त पेयों पर टैक्स और स्कूल परिसरों में जंक फूड पर रोक लगाई है। दक्षिण कोरिया और ताइवान ने बच्चों के कार्यक्रमों के दौरान ऐसे विज्ञापनों पर कड़ी शर्तें तय की हैं। कनाडा के क्यूबेक में तो 1980 के दशक से ही यह रोक प्रभावी है।
भारत में बच्चों और किशोरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि कम उम्र में टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और फैटी लिवर जैसी बीमारियां अब अपवाद नहीं रहीं।
इसके बावजूद टीवी, मोबाइल और सोशल मीडिया पर जंक फूड के रंगीन विज्ञापन बच्चों तक लगातार पहुंच रहे हैं। भारत में केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय विज्ञापन मानक परिषद ने बच्चों को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर दिशानिर्देश बनाए हैं, लेकिन ये ज्यादातर स्व-नियमन तक सीमित हैं।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने स्कूलों के आसपास जंक फूड की बिक्री और प्रचार रोकने के प्रस्ताव दिए, मगर देशभर में सख्त और समान लागू नियम अब तक नहीं बन पाए।
Published on:
06 Jan 2026 06:56 am
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