
Strait of Hormuz : अमेरिका और ईरान के बीच भड़के युद्ध के कारण दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट को सुलझाने के लिए ब्रिटेन ने कमान संभाल ली है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को फिर से खोलने के लिए एक बड़े कूटनीतिक मोर्चे का ऐलान किया है। इसी हफ्ते लंदन में 35 शक्तिशाली देशों का एक अहम शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाधित हुई तेल आपूर्ति को दोबारा सुचारू करना है। स्टार्मर ने साफ किया कि ब्रिटेन युद्ध का हिस्सा नहीं बनेगा, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के लिए कूटनीतिक कदम उठाएगा।
स्टार्मर ने लंदन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा कि ब्रिटेन अमेरिका और इजरायल के इस युद्ध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने जोर देकर कहा, "यह हमारा युद्ध नहीं है और इसमें उलझना हमारे राष्ट्रीय हित में नहीं है।" हालांकि, वैश्विक अर्थव्यवस्था को मंदी और महंगाई से बचाने के लिए इस जलमार्ग का खुलना बहुत जरूरी है।
इस अहम बैठक की मेजबानी ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेटे कूपर करेंगी। इसमें उन 35 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिन्होंने हाल ही में समुद्री सुरक्षा और स्वतंत्र नेविगेशन की बहाली के लिए एक साझा घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से इस गठबंधन में जापान, दक्षिण कोरिया के साथ-साथ भारत जैसे देशों की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
ब्रिटिश सरकार की रणनीति साफ है कि पहले कूटनीतिक रास्तों से ईरान पर दबाव बनाया जाए। अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकलता है, तो सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। स्टार्मर ने बताया कि राजनयिक वार्ता के तुरंत बाद सैन्य योजनाकार बैठक करेंगे। इसमें यह तय किया जाएगा कि युद्ध थमने के बाद इस समुद्री क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए नौसैनिक क्षमताओं का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से यूरोपीय देशों को खुद का तेल खुद सुरक्षित करने की नसीहत और नेटो को 'पेपर टाइगर' बताने वाले बयान पर ब्रिटेन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कीर स्टार्मर ने नेटो का मजबूती से बचाव करते हुए इसे दुनिया का सबसे प्रभावी सैन्य गठबंधन करार दिया। वहीं, ईरान के होर्मुज पर 'चोकहोल्ड' (पूर्ण नियंत्रण) के खिलाफ अब यूरोपीय और एशियाई देशों की नाराजगी खुल कर सामने आ रही है।
लंदन में होने वाली 35 देशों की इस बैठक के फैसलों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी। विदेश मंत्री यवेटे कूपर की अध्यक्षता में होने वाली कूटनीतिक चर्चा के बाद सैन्य अधिकारियों की जो बैठक होगी, उससे तय होगा कि होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा के लिए कोई संयुक्त नौसैनिक बेड़ा तैनात किया जाएगा या नहीं।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'ऑयल चोकपॉइंट' है। शांति के समय वैश्विक कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। 28 फरवरी से इसके बंद होने के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची है। भारत और जापान जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
Updated on:
01 Apr 2026 08:40 pm
Published on:
01 Apr 2026 08:32 pm
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