ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के सामने बड़ी चुनौती सामने आने वाली है। यहां रेलवे और एयरपोर्ट कर्मचारी क्रिसमस के दिन हड़ताल करने वाले हैं। ये हड़ताल कर्मचारियों की मांग को पूरा न किए जाने पर होने वाली है। इस हड़ताल से यात्रियों और टूरिस्ट को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
ब्रिटेन में जो लोग छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे हैं, उन्हें क्रिसमस के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि ब्रिटेन में बीते 30 साल की सबसे बड़ी हड़ताल होने जा रही है। ये महाहड़ताल क्रिसमस की छुट्टियों के दौरान हो रही है। इसमें बस, रेलवे, एयरपोर्ट, एंबुलेंस, नर्सिंग और पोस्टल स्टाफ समेत कई विभागों के दो लाख से ज्यादा कर्मचारी शामिल होंगे। इस हड़ताल के कारण क्रिसमस के दौरान ब्रिटेन आने वाले टूरिस्ट को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
वेतन में नहीं हो रही बढ़ोतरी
क्रिसमस के दिन ब्रिटेन में हर बार टूरिज्म में खासा उछाल देखने को मिलता है। मगर इस बार यहां क्रिसमस के लिए कुछ खास उत्साह देखने को नहीं मिल रहा। दिसंबर की शुरुआत से ही ब्रिटेन में हड़ताल का दौर बेरोकटोक जारी है। यहां हर विभाग के कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं। दरअसल यह सभी कर्मचारी महंगाई की मार झेल रहे हैं। वहीं इनकी मांग को भी पूरा नहीं किया जा रहा। सभी विभागों की माग अलग है, मगर सबकी मांग वेतन में बढ़ोतरी की है।
जगमगाहट की जगह सड़को पर नजर आ रही भीड़
इन कर्मचारियों का कहना है कि जिस रफ्तार से महंगाई बढ़ रही है, उस तेजी से हमारी सैलरी नहीं बढ़ रही। वहीं क्रिसमस आने से पहले यहां कि जो सड़के जगमगाहट से भर जाती थीं, वो अब भीड़ से भरी दिखाई दे रही है। इस हड़ताल कि शुरुआत 7 दिसंबर को टीचर्स के काम बंद करने के साथ हुई थी। उनकी मांग है कि सैलरी बढ़ाने के साथ-साथ पेंशन भी बढ़ाई जाए। वहीं, 13 से 17 दिसंबर के बीच लगभग 40 हजार रेलवे कर्मचारी हड़ताल करेंगे। रेलवे कर्मचारियों के हड़ताल करने की वजह से ब्रिटेन की 50 प्रतिशत रेलवे सर्विस प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
आपातकालीन सेवाएं रहेंगी जारी
जबकि, 15 और 20 दिसंबर को लगभग 1 लाख नर्सें हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं। हालांकि अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। वहीं, 21 और 28 दिसंबर को 10 हजार एंबुलेंस कर्मचारी हड़ताल पर बैठेंगे। 23 से 26 दिसंबर और 28 से 31 दिसंबर को एयरपोर्ट के कर्मचारी गैटविक, हीथ्रो, मैनचेस्टर, बर्मिंघम, ग्लासगो और कार्डिफ में हड़ताल करेंगे। बता दें, इससे पहले भी इतने बड़े स्तर पर करीब 30 साल पहले यानी साल 1989 में हड़ताल किया गया था। ये हड़ताल एंबुलेंस स्टाफ द्वारा सैलरी में बढ़ोतरी के लिए की गई थी।
कर्मचारियों की जगह सैनिक करेंगे काम
ये हड़ताल भारतीय मूल के ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक के सामने बड़ी चुनौती बन कर सामने आने वाली है। ब्रिटेन में टैक्स दरें बढ़ती जा रही है, मगर पीएम सुनक के हिसाब से ये फैसला सही है। लोगों को इसी बात से दिक्कत है कि वेतन पहले से कम है तो अधिक टैक्स कैसे दें। हड़तालियों का कहना है कि सरकार ने उनके सामने कोई और विकल्प नहीं छोड़ा है। वहीं, हड़ताल के इन दिनों में यात्रियों को ज्यादा दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार ने एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर सेना को तैनात करने का फैसला किया है। ताकि कर्मचारियों की जगह सैनिक काम कर सकें।
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