
पूरी दुनिया में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र ने हैती में हैजा फैलने के पीछे अपनी गलती स्वीकार कर ली है।
साल 2010 मेें हैती मेें भयानक भूकंप आया था। भूकंप पीडि़तों की मदद करने के लिए यूएन ने वहां अपना शांति मिशन भेजा था। लेकिन यह शांति मिशन दल हैती के लिए अभिशाप साबित हुआ।
शोधकर्ताओं के मुताबिक 2010 में हैती की सबसे बड़ी नदी में हैजे के विषाणु फैले। हैजे के विषाणु वाला गंदा पानी नदी में गया और देखते ही देखते पूरे हैती में हैजा फैल गया।
हैती के तमाम मानवाधिकार संगठनों की लाख कोशिशों के बावजूद भी यूएन पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।
अब कहा- ऐसी भूल न हो, बनाएंगे रणनीति
अपनी भूल स्वीकार करते हुए यूएन ने कहा है कि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को टालने के लिए नई योजना बनाई जा रही है। लेकिन सच्चाई इससे उलट है।
2012 में यूएन महासचिव बान की मून ने हैजे के सफाए के लिए 2.27 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट की पहल की थी, लेकिन इस 10 वर्षीय योजना के लिए यूएन अब तक पैसा नहीं जुटा सका है।
Published on:
21 Aug 2016 08:59 am
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