
नई दिल्ली।
अमरीका, ब्रिटेेन और आस्ट्रेलिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की दादागिरी कम करने और उसकी घेराबंदी क लिए नया त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ऑक्स यानी एयूकेयूएस का ऐलान किया है। यह बात अलग है कि इन तीनों देशों के इस नए गठजोड़ में भारत नहीं है, लेकिन ऑक्स की घोषणा भारत के लिए अच्छी खबर है, जबकि चीन के लिए परेशानी का सबब बनेगा।
वैश्विक सुरक्षा संबंधी घटनाक्रमों को देखते हुए भारत के आशावान होने की सबसे बड़ी वजह है कि इस नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठजोड़ से चीन की दादागिरी कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में संतुलन कायम हो सकेगा। ऑक्स से ये तीनों देश अपने साझा हितों की रक्षा कर सकेंगे और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां हासिल करने में आस्ट्रेलिया की मदद कर पाएंगे। इसके अलावा रक्षा क्षमताओं को भी बेतहर तरीके से साझा किया जा सकेगा।
इस गठबंधन के तहत तीनों राष्ट्र संयुक्त क्षमताओं के विकास करने, प्रोद्यौगिकी को साझा करने, सुरक्षा के गहन एकीकरण को बढ़ावा देने और रक्षा संबंधित विज्ञान, प्रोद्यौगिकी, औद्योगिक केंद्रों और आपूर्ति श्रंखलाओं को मजबूत करने पर सहमत हुए। सुरक्षा त्रिपक्षीय गठबंधन यानी ऑक्स एक तरह से चीन को कड़ा संदेश होगा। यह प्रमुख रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आस्ट्रेलिया की क्षमताओं को बढ़ाएगा।
ऑक्स आने से हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन को काबू में रखने के वैश्विक प्रयासों में मदद मिलेगी। ऑक्स आस्ट्रेलिया की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाएगा। यह इंडो-पैसिफिक में भारत के करीबी रणनीतिक साझेदारों में से एक बन गया है। साथ ही तीन देशों के नए गठबंधन से क्वॉड की क्षमताओं में भी बढ़ोतरी होगी। इसमें अमरीका और आस्ट्रेलिया दोनों सदस्य हैं।
Published on:
17 Sept 2021 12:49 pm

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