
अमरीका की अमरीका प्रतिनिधि सभा यानी हाउस हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव ने सेम-सेक्स मैरिज बिल को मंजूरी दे दी। यह बिल अब राष्ट्रपति जो बाइडन के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा। बाइडन खुद सेम-सेक्स मैरिज को कानूनी सुरक्षा के पक्ष में है, ऐसे में वे इस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। बाइडन के हस्ताक्षर के बाद अमेरिका में समलैंगिक विवाह(same-sex marriage) को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। यह प्रक्रिया इसी माह पूरी हो सकती है।
इसलिए दिखाई डेमोक्रेट्स ने जल्दी
बिल का पारित होना डेमोक्रेट्स (Democrats) के लिए एक जीत है, जिन्होंने चिंता जताई थी कि गर्भपात के संघीय अधिकार से जुड़े रो बनाम वेड (Roe v. Wade) के फैसले को पलटने के बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट समलैंगिक जोड़ों के अधिकारों को भी उलट सकता है। समलैंगिकों को डर था कि कहीं उनके विवाह पर भी कोई सख्त फैसला न आ जाए। इसके बाद बाइडन सरकार ने तेजी दिखाई। संसद में डेमोक्रेट्स ने बिल का मसौदा तैयार किया। हाउस में 258—169 बहुमत से यह कानून पारित हुआ। वोट खत्म होने पर सदन में जोरदार तालियां बजीं। बिल को पिछले सप्ताह 61—36 बहुमत से सीनेट में पारित किया गया था।
जनवरी से पहले बाइडन के हस्ताक्षर
कानून राज्यों को 'सेक्स, जाति, जातीयता या राष्ट्रीय मूल' की परवाह किए बिना समलैंगिक विवाहों को सभी राज्यों में मान्यता देता है। अब बाइडन इस पर साइन करेंगे। जनवरी में हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव (House of Representatives) पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन (Republican) पार्टी के कंट्रोल में आ जाएगा। ऐसे में डेमोक्रेट राष्ट्रपति जो बाइडन इसी माह दिसंबर में इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना सकते हैं।
विरोधियों ने 'प्राकृतिक विवाह' का किया बचाव
सदन में अधिकांश रिपब्लिकन ने कानून का विरोध किया। वर्जीनिया के रिपब्लिकन प्रतिनिधि बॉब गुड ने कहा, भगवान का आदर्श डिजाइन वास्तव में जीवन के लिए एक पुरुष और एक महिला के बीच विवाह है। मिसौरी के रिपब्लिकन विक्की हर्ट्जलर ने सहयोगियों से बिल के खिलाफ मतदान करने का आग्रह किया, जो उन्होंने कहा कि यह एक पुरुष और एक महिला के बीच 'प्राकृतिक विवाह' को कमजोर करता है।
भारत में फिलहाल नहीं मान्यता
भारत में सेम सेक्स मैरिज को मान्यता नहीं है। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में पार्थ फिरोज मेहरोत्रा और उदय राज आनंद की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि सेम सेक्स जोड़ों के विवाह को मान्यता न देना उनके अधिकारों का हनन है। याचिका में समलैंगिक विवाह को स्पेशल मैरिज एक्ट-1954 में शामिल करने की मांग उठाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
33 देश दे चुके अब तक मंजूरी
नीदरलैंड ने सबसे पहले साल 2001 में सेम सेक्स मैरिज को मंजूरी दी थी। अब तक दुनिया के करीब 33 देशों में समलैंगिक विवाह को मंजूरी मिल चुकी है। 2022 में चिली, स्विट्जरलैंड और मेक्सिको ने भी दी मंजूरी। जी—7 देशों में जापान इकलौता देश हैं जहां समलैंगिक विवाह को मंजूरी नहीं है। ताइवान इकलौता एशियाई देश है जहां समलैंगिक विवाह कानूनी रूप से मान्यता हासिल है।
Published on:
09 Dec 2022 10:12 am
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