
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो: द वॉशिंगटन पोस्ट)
US Visa New Policy Impact: जो भारतीय नागरिक अमेरिका में रह कर स्थायी निवास के लिए (ग्रीन कार्ड) का सपना देख रहे हैं, उनके लिए एक बड़ी और चिंताजनक खबर है। अमेरिकी सरकार ने अपनी आव्रजन नीति में एक बड़ा संशोधन किया है। नए नियमों के मुताबिक, अब जो विदेशी नागरिक अस्थायी वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, उन्हें ग्रीन कार्ड आवेदन के लिए अपने मूल देश वापस लौटना होगा। यानि अब अमेरिका में रह कर 'स्टेटस एडजस्टमेंट' आसान नहीं होगा।
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज की ओर से जारी ताजा दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि अमेरिका के अंदर रह कर स्टेटस बदलना अब एक 'असाधारण राहत' माना जाएगा। यह सुविधा केवल बहुत ही सीमित और विशेष परिस्थितियों में दी जाएगी। सामान्य तौर पर, छात्रों (F-1 वीजा), पर्यटकों (B-1/B-2) और H-1B जैसे अस्थायी श्रमिकों को अपने देश लौट कर वहां के अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के जरिये ही आव्रजन प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
USCIS के प्रवक्ता जेक काहलर के अनुसार, इस नीति का उद्देश्य आव्रजन कानून के मूल मकसद को बहाल करना है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अस्थायी वीजा पर आने वाले लोगों से यह उम्मीद की जाती है कि अवधि खत्म होने पर वे अपने देश लौट जाएं। इस कदम से अमेरिकी आव्रजन प्रणाली पर प्रशासनिक बोझ कम होगा। साथ ही, उन मामलों में भी कमी आएगी जहां लोग वीजा खत्म होने के बाद अमेरिका में अवैध रूप से छिप कर रहने लगते हैं। अब एजेंसी अपना ध्यान मानव तस्करी के पीड़ितों को न्याय दिलाने और नागरिकता के अन्य जरूरी आवेदनों पर केंद्रित कर सकेगी।
अमेरिका में वर्तमान में करीब 45 से 50 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से एक बहुत बड़ा हिस्सा आईटी प्रोफेशनल्स (H-1B वीजा धारक) और छात्रों का है। हर साल हजारों भारतीय 'स्टेटस एडजस्टमेंट' के जरिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते थे। इस नए नियम से सबसे ज्यादा परेशानी उन भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को होगी जो सालों से ग्रीन कार्ड के बैकलाग में फंसे हैं। अब 'असाधारण परिस्थितियों' को साबित किए बिना अमेरिका में रहते हुए यह प्रक्रिया पूरी करना नामुमकिन हो जाएगा, जिससे परिवारों के अलग होने और यात्रा का खर्च बढ़ने का खतरा बढ़ गया है।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 23 मई से चार दिवसीय भारत दौरे पर आ रहे हैं। इस यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों और व्यापार पर चर्चा होनी है, लेकिन ठीक उससे पहले आए इस कड़े आव्रजन फैसले से भारतीय राजनयिकों की चिंता बढ़ सकती है।
इस नीति का एक दूसरा पहलू यह भी है कि अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों पर अचानक काम का बोझ बहुत बढ़ जाएगा। भारत में अमेरिकी दूतावासों में पहले से ही वीजा इंटरव्यू के लिए लंबा वेटिंग पीरियड रहता है। अब लाखों लोगों के वापस लौटने से यह संकट और गहरा सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत सरकार विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाती है। क्या आईटी कंपनियों के दबाव में अमेरिकी सरकार 'असाधारण परिस्थितियों' के दायरे को बढ़ाएगी या नियमों में कुछ ढील देगी? (इनपुट: ANI)
Published on:
22 May 2026 10:09 pm
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