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US Iran Ceasefire: ‘अमेरिका ने युद्ध रोकने की भीख मांगी’, ईरान का बड़ा दावा, जीत का किया ऐलान

US Iran Ceasefire: सीजफायर की घोषणा के बीद ईरान ने जीत का दावा करते हुए यह कहा है कि अमेरिका ने उससे युद्ध रोकने की भीख मांगी थी। जबकि ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए पूरी और अंतिम जीत बताया है।

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भारत

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Himadri Joshi

Apr 08, 2026

Donald Trump and Mojtaba Khamenei

Donald Trump and Mojtaba Khamenei

US Iran Ceasefire: मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव ने हाल के हफ्तों में गंभीर रूप ले लिया था। ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच टकराव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी थी। एक महीने से ज्यादा समय तक चले इस युद्ध के बाद अब आखिरकार जाकर दोनों पक्षों की तरफ से सीजफायर की घोषणा हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 दिन के सीजफायर का ऐलान करते हुए यह ईरानी समझौते को अमेरिका की जीत बताया था लेकिन अब ईरान का इस मामले पर इससे अलग बयान सामने आया है। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने इसे ऐतिहासिक जीत बताते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान से युद्ध रोकने केी भीख मांगी थी।

ईरान ने कहा अमेरिका उसके सामने गिड़गिड़ाया

ईरानी परिषद ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि देश की जनता और सैनिकों के बलिदान के कारण दुश्मन को झुकना पड़ा। बयान में कहा गया कि पिछले एक महीने से विरोधी पक्ष सीजफायर के लिए गिड़गिड़ा रहा था। ईरान ने यह भी कहा कि उसने यूएस द्वारा तय किसी भी डेडलाइन को कभी महत्व नहीं दिया। दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे है कि सीजफायर से अमेरिका ने अपने रणनीतिक लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और यह अमेरिका के लिए 100 प्रतिशत जीत है।

ईरान के 10 पॉइंट वाले प्रस्ताव पर हुआ सीजफायर

ईरान ने अपने 10-पॉइंट प्रस्ताव को इस संघर्ष का आधार बताया है, जिसे पाकिस्तान के जरिए यूएस तक पहुंचाया गया। इस प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर ईरानी नियंत्रण, क्षेत्र से यूएस सेना की वापसी और सुरक्षित समुद्री नेविगेशन प्रोटोकॉल शामिल हैं। साथ ही एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस के तहत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की बात भी कही गई है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों के जरिए वह अपने सैन्य लाभ को राजनीतिक सफलता में बदलना चाहता है।

इस्लाबाद में होगी बातचीत

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के निर्देश पर अब इस्लामाबाद में बातचीत की तैयारी हो रही है। इन वार्ताओं का उद्देश्य 15 दिनों के भीतर सभी शर्तों को अंतिम रूप देना है। हालांकि ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है, बल्कि अंतिम समझौते के बाद ही संघर्ष पूरी तरह खत्म माना जाएगा। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इन वार्ताओं पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।