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जंग के बीच अमेरिका का बड़ा U-टर्न, ईरान को ग्लोबल इकोनॉमी में लाने की बात, मोसाद की अलग चेतावनी

Iran US War: सीजफायर के बीच अमेरिका ने ईरान को लेकर नई रणनीति बनाई है। ट्रंप ने ईरान को ग्लोबल इकोनॉमी में शामिल करने की बात कही, वहीं मोसाद ने सख्त चेतावनी दी है। जानें क्या है अमेरका का बड़ा दांव?
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भारत

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Rahul Yadav

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Updated: 15 Apr 2026, 4:13 PM IST

US Iran Deal Update

US Iran Deal Update (AI Image)

US Iran Ceasefire Trump Plan Global Economy: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच फिलहाल सीजफायर लागू है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि युद्ध का अंत अब बहुत करीब हो सकता है और अमेरिका ईरान के साथ समझौते की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की समयसीमा खत्म होने में करीब एक सप्ताह का समय बचा है और दुनिया भर में कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं।

ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में शामिल करने की योजना

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस दिशा में बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक 'ट्रम्पियन ग्रैंड बार्गेन' के तहत ईरान को दोबारा वैश्विक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनाना चाहता है।

वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों में फिर से सक्रिय भूमिका निभाए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि दोनों देशों के बीच मतभेद गहरे हैं और किसी भी समझौते तक पहुंचने में समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल को ट्रंप ने गुड फेथ के साथ बातचीत करने का निर्देश दिया है।

दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर जल्द ही हो सकता है। बताया जा रहा है कि यह बैठक पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद या किसी अन्य तटस्थ स्थान पर आयोजित की जा सकती है। दोनों पक्षों ने बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।

इजरायल का सख्त रुख, मोसाद की चेतावनी

जहां अमेरिका कूटनीतिक रास्ता तलाश रहा है, वहीं इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने अलग रुख अपनाया है।

मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया ने साफ कहा है कि ईरान के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और उनका मिशन तब तक पूरा नहीं माना जाएगा, जब तक ईरान में मौजूदा शासन व्यवस्था में बदलाव नहीं होता। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि क्षेत्रीय स्तर पर सभी पक्ष एक ही रणनीति पर सहमत नहीं हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता

इस पूरे संकट का असर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर भी साफ दिख रहा है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20 प्रतिशत वैश्विक कच्चा तेल गुजरता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर सीधा असर डाल सकता है।

अन्य घटनाक्रम

इस बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने संकेत दिया है कि ईरानी तेल की सीमित बिक्री की अनुमति जल्द खत्म हो सकती है और इसे आगे बढ़ाया नहीं जाएगा। वहीं, ईरान ने दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों से उसे करीब 270 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है और वह इस नुकसान की भरपाई की मांग भी कर रहा है। इंटरनेट शटडाउन जैसे हालात भी ईरान में जारी हैं, जिससे आम जीवन और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

क्या समझौते की राह आसान होगी?

फिलहाल तस्वीर मिली-जुली नजर आ रही है। एक तरफ अमेरिका समझौते की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में शामिल करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल का सख्त रुख और जमीनी हालात इस प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं। अब सबकी नजर आने वाले कुछ दिनों पर टिकी है, क्योंकि यही तय करेंगे कि क्या यह सीजफायर स्थायी शांति में बदलेगा या फिर क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ेगा।