
डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (फोटो- एएनआई)
US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ था, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता पर लगातार खतरा मंडरा रहा था। खासकर होर्मुज स्टेट को लेकर विवाद ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी थी। इसी बीच एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि व्हाइट हाउस ने ईरान के साथ सीजफायर कराने के लिए पाकिस्तान पर दबाव बनाया था। पाकिस्तान को अहम माध्यम के रूप में इस्तेमाल करते हुए अमेरिका ने तक पहुंच बनाई और अस्थायी सीजफायर संभव कराया।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने कई हफ्तों तक इस्लामाबाद के जरिए तेहरान को समझाने की कोशिश की। पाकिस्तान की भौगोलिक और धार्मिक स्थिति को देखते हुए उसे इस संवेदनशील कूटनीति में एक प्रभावी कड़ी माना गया। पाकिस्तान सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने इस प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई और अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इस दौरान अमेरिका की तरफ से तैयार प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाए गए, जिनमें परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तें भी शामिल थीं।
बताया गया कि अमेरिका ने 15 बिंदुओं का एक प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को भेजा, जिसके जवाब में ईरान ने भी अपने सुझाव दिए। धीरे-धीरे बातचीत आगे बढ़ी और दोनों पक्ष कुछ मुद्दों पर सहमत हुए। यह पूरी प्रक्रिया बैकचैनल डिप्लोमेसी के जरिए संचालित हुई, जिससे सार्वजनिक बयानबाजी से अलग शांतिपूर्ण समाधान खोजा गया। इसके चलते आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर लागू हुआ, जिसे इस कूटनीतिक प्रयास की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सोशल मीडिया अपील भी व्हाइट हाउस की मंजूरी के बाद ही जारी की गई थी। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे गहरी रणनीतिक साझेदारी थी। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर ट्रंप का रुख आक्रामक बना रहा, लेकिन अंदरखाने बातचीत जारी थी। इस घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बैकचैनल संवाद आज भी प्रभावी भूमिका निभाता है और संकट समाधान में अहम साबित हो सकता है।
Updated on:
09 Apr 2026 10:55 am
Published on:
09 Apr 2026 10:55 am
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